नमस्कार में चमत्कार

भारत का ज्ञान महान है भाई,
संस्कार भी देखो कैसे हैं भाई।
करते स्वागत नमस्कार से भाई,
नमस्कार में चमत्कार।।
जैन समाज तो हजार वर्षों से,
मास्क लगाते नाक मुँह पर भाई।
अब नए समाज ने परम्परा है अपनाई,
जब कोरोना आया है भाई।।
भारत के वेदों में ज्ञान का भंडार,
कहते कण-कण में है भगवान।
मतलब हर चीज में है जान,
वायरस क्या यही तो जीव।।
जो न दिखाई दे कभी आँखों से,
वैज्ञानिक तो अब खोज कर रहे।
ऋषि मुनि बतला गए तभी,
84 लाख योनियों से गुजरो
तब जन्म मिले मनुष्य को।।
आज ग्लोबल वार्मिंग के लिए,
रो रहे हैं सभी देखो भाई।
आदिकाल से भारतीय कहते आये,
वनस्पति शांति वायु शांति अग्नि शांति
वनस्पति शांति।।
बता दिया तभी जीव बना पाँच तत्वों से,
तत्व का ज्ञान तो देखो तभी से।
वैज्ञानिक तो अब खोज रहे
किस ग्रह में जीवन है भाई,
रावण तो बतला गया तभी भाई
की तीन लोक चौदह भुवन
सुने सकल दशानन पाई।।
आओ हम सब मिल  संकल्प करें,
यज्ञ करें नित योग करें निरोग रहे।
भारतीय वैदिक संस्कृति को अपनाएँ।

रचयिता
माधुरी पौराणिक,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय हस्तिनापुर,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-झाँसी।

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