पर्यावरण बचाना है

अपनी प्यारी इस धरती को
वृक्षों और लताओं से
सुन्दर रंगीन परिधानों से
हमको आज सजाना है 

पर्यावरण बचाना है
 प्यारी धरा जब मुस्काएगी
प्रकृति स्वयम पर इतराएगी
जब फूल खिलेंगे वृक्षों पर
डाली-डाली तब शरमाएगी
इस प्यारी सी धरती को
वृक्षों से हमें सजाना है
पर्यावरण बचाना है

न कोई रोग न कोई वाइरस
आकर यहाँ टिक पाएगा
जब नदियों तालाबों झीलों में
कोई गन्दगी न फैलाएगा
प्यारे-प्यारे इन पहाड़ों को 
वृक्षों से आज सजाना है
पर्यावरण बचाना है

रचयिता
प्रभा बहुगुणा,
सहायक अध्यापक,
रा0 प्रा0 विद्यालय बेमर,
विकास खण्ड-नरेन्द्रनगर,
जनपद-टिहरी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।

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