बच्चों को सिखा जाना
बड़ा मुश्किल है इंसान का नेक इंसान बना जाना,
लहू तो सुर्ख एक ही है गुनहगारों को समझाना,
मैं पुतला हूँ इस मिट्टी का मुझे मिट्टी मिला जाना,
इल्तज़ा है बस इतनी सी गुनाह इतना किए जाना,
गुरु इस जग में आप ही हैं भले इंसान बना जाना।
कोई जब पूछ ये बैठे किया क्या तुमने दुनिया में,
नाम एक नेक बच्चे का ज़माने को बता जाना।
भलाई क्या? बुराई क्या? और क्या होता है मजहब?
मेरी ये आरज़ू गुरुवर, ये बच्चों को सिखा जाना।
रचयिता
नवीन कुमार,
सहायक अध्यापक,
माडल विद्यालय कलाई,
विकास खण्ड-धनीपुर,
जनपद-अलीगढ़।
लहू तो सुर्ख एक ही है गुनहगारों को समझाना,
मैं पुतला हूँ इस मिट्टी का मुझे मिट्टी मिला जाना,
इल्तज़ा है बस इतनी सी गुनाह इतना किए जाना,
गुरु इस जग में आप ही हैं भले इंसान बना जाना।
कोई जब पूछ ये बैठे किया क्या तुमने दुनिया में,
नाम एक नेक बच्चे का ज़माने को बता जाना।
भलाई क्या? बुराई क्या? और क्या होता है मजहब?
मेरी ये आरज़ू गुरुवर, ये बच्चों को सिखा जाना।
रचयिता
नवीन कुमार,
सहायक अध्यापक,
माडल विद्यालय कलाई,
विकास खण्ड-धनीपुर,
जनपद-अलीगढ़।

सुन्दर व यथार्थ अभिव्यक्ति
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