होली बीती

हर्षोल्लास से मनाया होगा
   सबने    यह   त्योहार,
  आये यह प्यारा सा दिन
     जीवन मेंं बार-बार।।
बेशक गया इस साल का
   यह रंगीन त्योहार,
उम्मीद न छोडो दोस्तों
आएगी फिर रंगों की बहार।।
  जिन्दगी के झमेलों से
 कल थे जैसे तुम अनजान,
   रंग   बहुत हैं जीवन में
बने रहो तुम यूँ ही नादान।।
जीवन को न समझें  बेरंग
   रंग तुम्हीं ने भरने है,
खुशियाँ आएँ जीवन में सबकी
   कुछ ऐसे काम करने हैं।।
खुदा करे ये होली चाँद बन यूँ आए
सबके जीवन में सतरंगी बहार लाये।।
      गिले शिकवे मिटा
     गया यह त्योहार,
   गिले शिकवे मिटाने फिर से
      लायेगा   रंगों  की फुहार।।
      तन भी भीगे होंगे
          मन   भी भीगे होंगे,
     साल भर के राग द्वेष
       रंगों से धोये होंगे।।
       कल कैसे खेले थे 
     ये होली याद आती है,
साल भर करो इन्तजार
मन को हर्षित कर जाती हैं।।

रचयिता
इन्दु पंवार,
प्रधानाध्यापक,
रा. प्राथमिक विद्यालय गिरगाँव,
जनपद-पौड़ी गढ़वाल,
उत्तराखण्ड।

Comments

  1. Replies
    1. बहुत सुन्दर रचना

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  2. Holi hai rangon ka tyohar.jo sabke Jeevan me rangon ki mitthas gholker chapter jaati hai.Behtreen Rachana ma,am.

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