मैं नारी हूँ

मैं नदी की तरह बहती हूँ सबकी प्यास बुझाती हूँ,
पहचान बताऊँ क्या अपनी मैं नारी हूँ।
मैं अबीर जैसी विस्तृत हूँ आँचल में सबको समेटे हूँ,
पहचान बताऊँ क्या अपनी मैं नारी हूँ।
मैं साज जैसी गहरी हूँ सबके दुःख दर्द समेटे हूँ,
पहचान बताऊँ क्या अपनी मैं नारी हूँ।
पृथ्वी जैसी गम्भीर हूँ, मैं हृदय में धैर्य समेटे हूँ,
पहचान बताऊँ क्या अपनी मैं नारी हूँ।
मैं ही नींव हूँ इस जग की मैं हरीतिमा प्रकृति की हूँ,
पहचान बताऊँ क्या अपनी मैं नारी हूँ।
मैं बेटी हूँ, पत्नी हूँ, बहन भी हूँ मैं ममता की मूरत हूँ,
पहचान बताऊँ क्या अपनी मैं नारी हूँ।

रचयिता
रश्मि पाण्डेय,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय चक अलादातपुर,
विकास खण्ड-हथगाम, 
जनपद-फतेहपुर।


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