चिड़िया रानी

चिड़िया रानी चिड़िया रानी,
बड़े सबेरे तुम उठ जातीं
फुदक फुदक कर चलतीं तुम।
^^
मेरे आँगन में अपने कलरव से,
सबका मन हर लेती हो तुम
कितनी प्यार कितनी प्यारी
चिड़िया रानी चिड़िया रानी।।
^^
आसमां में पंख फैला जब तुम उड़तीं
तब मैं भी सोच में डूब- डूब जाती।
पंख होते तो मैं भी उड़ जाती
आसमां की सैर कर आती
^^
कितनी सुंदर है ये आजादी
तिनका-तिनका लेके नीड़ बनाती।
शाम ढले तुम घर में जब आतीं
अपने घोंसले में तुम सो जातीं
हमे समय की पाबंदी सिखातीं
^^
मेरी प्यारी चिड़िया रानी
नहीं दिखाई देती हो अब तुम
मेरा आँगन सूना-सूना बिन तुम
कहाँ छिपी रहती हो तुम
जल्दी से आ जाओ आँगन में तुम
अपने कलरव से मन को महका दो।

रचयिता
माधुरी पौराणिक,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय हस्तिनापुर,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-झाँसी।

Comments

Total Pageviews