बेटी

जन्मी हूँ कोख से तेरी
माँ फिर ये अन्तर क्यों?
बेटे को तू गले लगाती
मुझे कोसे निरंतर क्यों?

बेटे है गर कुल दीपक
तो बेटी घर की शान है
बेटी बिना संसार नहीं
क्यूँ तू इससे अनजान है?

बेटे को खूब पढ़ाते हो
मुझसे क्यूँ काम कराती है?
वो खूब प्यारा लगता है
क्यूँ मुझे पराया समझती है?

बेटे को तू दूध पिलाये
मुझे क्यूँ सूखी रोटी देती है?
मुन्ने के दर्द पे तड़पे तू
ये मुन्नी भी तो तेरी बेटी है!
         
रचयिता
चैतन्य कुमार,
सहायक शिक्षक,
मध्य विद्यालय तीरा,
ग्राम+पत्रालय:- तीरा खारदह,
प्रखण्ड:- सिकटी,
भाया:- कुर्साकाँटा,
जिला:- अररिया,
राज्य:- बिहार।

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