नारी
तर्ज - सुबह सवेरे लेकर तेरा नाम प्रभु
नारी का सम्मान बढ़ाना है हमको
और हौंसला खूब बढ़ाना है हमको
(1)जीवन को खुशहाल बनाती है
नारी,
खुद का कर बलिदान सजाती
घर नारी।
हाँ ....खुद का कर बलिदान
सजाती घर नारी।
माँ, बेटीे और भगिनी वनिता बन
नारी,
जीवन को खुशहाल बनाती है
नारी।।
(2)घर-घर में बहुरूप में दिखती
है नारी,
रिश्तों की हर डोर संजोती है
नारी।
नारी का अभिमान है सुंदर घर
उसका,
नारी का सम्मान जगत में पति
उसका।
हाँ..नारी का सम्मान जगत में
पति उसका
नर नारी ईश्वर कृति के यह
अनमोल रतन
नारी हर रिश्ते की लाज रखे
और रहे मगन।।
(4)बचपन में बेटी बन दुलराती है
फिर बाबुल का घर छोड़ पिया
संग जाती है।
गाड़ी के दो पहिए सी पति संग
बढ़े,
हर जिम्मेदारी खूब निभाती है
नारी।
अपनी ममता की छाँव दिलाती है
नारी।
हाँ.. अपनी ममता की छाँव दिलाती है नारी।
नारी का...
(5)नारी के बलिदानों की क्या
बात करें।
स्वयं समर्पित होकर जग
उत्थान करें।
हाँ ..स्वयं समर्पित होकर जग
उत्थान करें।
राधा, सीता, मीरा, दुर्गा और काली
शची, लक्ष्मी और द्रौपदी सी नारी।
नारी का सम्मान बढ़ाना है हमको
और हौंसला खूब बढ़ाना है हमको
(6)किन्तु हाय उन दुर्योधन की
क्या बात करें।
जो माँ की परवरिश को
शर्मसार करे।
आज यहाँ पर कभी कहीं
द्रौपदी की खिंचती साड़ी।
कभी-कभी हमको दुशासन
दिखता भारी।
नारी पर ही आन पड़ी जिम्मेदारी
दुशासन को सही राह पर लानाहै।
हाँ नारी का सम्मान बढ़ाना है।
रचयिता
नीलम भदौरिया,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय पहरवापुर,
विकास खण्ड-मलवां,
जनपद-फतेहपुर।
नारी का सम्मान बढ़ाना है हमको
और हौंसला खूब बढ़ाना है हमको
(1)जीवन को खुशहाल बनाती है
नारी,
खुद का कर बलिदान सजाती
घर नारी।
हाँ ....खुद का कर बलिदान
सजाती घर नारी।
माँ, बेटीे और भगिनी वनिता बन
नारी,
जीवन को खुशहाल बनाती है
नारी।।
(2)घर-घर में बहुरूप में दिखती
है नारी,
रिश्तों की हर डोर संजोती है
नारी।
नारी का अभिमान है सुंदर घर
उसका,
नारी का सम्मान जगत में पति
उसका।
हाँ..नारी का सम्मान जगत में
पति उसका
नर नारी ईश्वर कृति के यह
अनमोल रतन
नारी हर रिश्ते की लाज रखे
और रहे मगन।।
(4)बचपन में बेटी बन दुलराती है
फिर बाबुल का घर छोड़ पिया
संग जाती है।
गाड़ी के दो पहिए सी पति संग
बढ़े,
हर जिम्मेदारी खूब निभाती है
नारी।
अपनी ममता की छाँव दिलाती है
नारी।
हाँ.. अपनी ममता की छाँव दिलाती है नारी।
नारी का...
(5)नारी के बलिदानों की क्या
बात करें।
स्वयं समर्पित होकर जग
उत्थान करें।
हाँ ..स्वयं समर्पित होकर जग
उत्थान करें।
राधा, सीता, मीरा, दुर्गा और काली
शची, लक्ष्मी और द्रौपदी सी नारी।
नारी का सम्मान बढ़ाना है हमको
और हौंसला खूब बढ़ाना है हमको
(6)किन्तु हाय उन दुर्योधन की
क्या बात करें।
जो माँ की परवरिश को
शर्मसार करे।
आज यहाँ पर कभी कहीं
द्रौपदी की खिंचती साड़ी।
कभी-कभी हमको दुशासन
दिखता भारी।
नारी पर ही आन पड़ी जिम्मेदारी
दुशासन को सही राह पर लानाहै।
हाँ नारी का सम्मान बढ़ाना है।
रचयिता
नीलम भदौरिया,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय पहरवापुर,
विकास खण्ड-मलवां,
जनपद-फतेहपुर।

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