मैं स्त्री हूँ

मैं स्त्री हूँ
 मैं कुछ भी कर सकती हूँ।

 मैं प्रेम, मैं करुणा
 मैं दया, मैं प्रेरणा
 हर संवेग समाहित मुझमें
 दिखाती वही जो हो सबके हित में
 हर जन का मैं आधार
 सौम्यता का मुझमें संचार
 यदि मेरे अस्तित्व को ललकारा तो
 मैं रौद्र रूप भी धर सकती हूँ।

 मैं स्त्री हूँ
 मैं कुछ भी कर सकती हूँ।

 मैं शक्ति, मैं भक्ति
 मैं आस्था, मैं विश्वास
 हर टूटती उम्मीदों की मैं आस
 पग-पग पर हो काँटे बिछे
 किंचित भी ना होती मैं हताश
 मैं उन काँटों को भी पुष्प
में परिवर्तित कर सकती हूँ।

 मैं स्त्री हूँ
 मैं कुछ भी कर सकती हूँ।

 मैं पत्नी, मैं माँ
 मैं भाभी, मैं बहन
 हर रिश्ते को दिल से निभाती
 सब पर जी जान लुटाती
यदि उन पर उठे कृपाण तो
मै अपने परिवार की ढाल भी बन सकती हूँ।

मैं स्त्री हूँ
मैं कुछ भी कर सकती हूँ।

रचयिता
रीनू पाल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय दिलावलपुर,
विकास खण्ड - देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

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