रंग बिरंगी होली
खेतों पर सोना बिखराती
आई रंग बिरंगी होली।
तन को रंगती, मन को रंगती,
सबके मन को भाई होली।।
कोई मलता है गुलाल तो
कोई रंग उछाल रहा है।
झांझ - मंजीर बज रहे,
कोई दे ढोलक पर ताल
रहा है।।
छोटा मुन्नू रंग में डूबा,
खुश हो मार रहा किलकारी।
सब पर रंग की वर्षा करता,
हाथ लिए लंबी पिचकारी।।
सभी ओर होली ही
होली,
होली बाहर होली
अंदर।
चाचा जी पर रंग
चढ़ा है,
बने हुए हैं पूरे
बन्दर।।
हम सब बैर भाव को भूले,
होली प्रेम बढ़ाती आई।
हम सब की माँ भारत माता,
सब लगते आपस में भाई।।
रचयिता
शिल्पी गोयल,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय निज़ामपुर,
विकास खण्ड-सिकन्दराबाद,
जिला-बुलंदशहर।
आई रंग बिरंगी होली।
तन को रंगती, मन को रंगती,
सबके मन को भाई होली।।
कोई मलता है गुलाल तो
कोई रंग उछाल रहा है।
झांझ - मंजीर बज रहे,
कोई दे ढोलक पर ताल
रहा है।।
छोटा मुन्नू रंग में डूबा,
खुश हो मार रहा किलकारी।
सब पर रंग की वर्षा करता,
हाथ लिए लंबी पिचकारी।।
सभी ओर होली ही
होली,
होली बाहर होली
अंदर।
चाचा जी पर रंग
चढ़ा है,
बने हुए हैं पूरे
बन्दर।।
हम सब बैर भाव को भूले,
होली प्रेम बढ़ाती आई।
हम सब की माँ भारत माता,
सब लगते आपस में भाई।।
रचयिता
शिल्पी गोयल,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय निज़ामपुर,
विकास खण्ड-सिकन्दराबाद,
जिला-बुलंदशहर।

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