फगुनी बयार

फागुन मास की पूर्णिमा का पर्व
कराता हमको संस्कृति पर गर्व
लुटायें एक दूजे पर ख़ुशियों का धन
तोड़ दें धर्म, जाति, सम्प्रदाय का बंधन
होली में छिपी है देश की रीत
होलिका की हार भक्त प्रह्लाद की जीत
आओ होली का त्योहार मनायें खास
सबको करायें अपनेपन का एहसास
इस बार लगायें अलग प्रकार का रंग
प्रेम, सौहार्द, शक्ति व नई पहल का रंग
होली की अग्नि में कर दें स्वाहा
द्वेष, नफ़रत, घृणा व दिखावा
मिलकर मनायें होली का त्योहार
इस बार दें इस पर्व को नया आकार।

रचयिता
इला सिंह,
सहायक अध्यापिका,
कम्पोजिट विद्यालय पनेरुआ,
विकास खण्ड-अमौली, 
जनपद-फ़तेहपुर।

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