कोरोना से सीख

मानव को कुछ पता नहीं एकत्र किया धन और सोना।
सीख पुरानी भूल गया दस्तक दे आया कोरोना।।

महामारी फैली जग में हम तुम सब पीड़ित हैं भाई।
दिवास्वप्न ख्वाब भूलो बस मुँह हाथ पैर धोना।।

अपने घर में बंद रहो सब नहीं जरुरी काम कोई।
धन पाने जो भाग रहे थे दुनिया का कोना-कोना।।

कोरोना महामारी है हर तरफ सफाई रखनी है।
हम बंद रखें आवागमन धैर्य नहीं हमको खोना।।

धन दौलत पद भूलो सब जीवन बहुत कीमती है।
सत्कर्म भाग्य ही बचा पाएगा बंद करो रोना-धोना।।

स्वच्छ रहें सब स्वस्थ रहें दूरी सबसे रखना भाई।
संपर्क नहीं है उचित महामारी का बीज नहीं बोना।।

प्राकृतिक कोप का भाजन बनता विश्व सीख दे जाएगा।
सर्वोपरि मानवहित ही ऐसा अनुसंधान करो ना।।

रचयिता
श्रीमती नैमिष शर्मा,
एस0आर0 पी0 निष्ठा प्रशिक्षण,
विकास खण्ड-मथुरा,
जिला-मथुरा।
उत्तर प्रदेश।

Comments

Post a Comment

Total Pageviews