माँ
माँ और माँ का प्यार निराला
उसने ही मुझे सँभाला
प्यार ये तेरा कैसा है माँ
सीधा-सादा भोला भाला
कितनी भी बड़ी हो जाऊँ मैं
माँ आज भी तेरे लिए बच्ची हूँ
दुनिया का पहला प्रेम माँ है
धरती पर जैसे ईश्वर है माँ
माँ बिन जीवन अधूरा है
काटोभरी मे फूलों का एहसास है माँ
हमारी खुशी मै खुश होती माँ
दुख में हमारे आँसू बहाती
माँ और माँ का प्यार निराला
उसने ही मुझे सँभाला
रचयिता
समरीन,
शिक्षामित्र,
प्राथमिक विद्यालय नं0-2,
विकास खण्ड-पिलखुवा,
जनपद-हापुड़।
उसने ही मुझे सँभाला
प्यार ये तेरा कैसा है माँ
सीधा-सादा भोला भाला
कितनी भी बड़ी हो जाऊँ मैं
माँ आज भी तेरे लिए बच्ची हूँ
दुनिया का पहला प्रेम माँ है
धरती पर जैसे ईश्वर है माँ
माँ बिन जीवन अधूरा है
काटोभरी मे फूलों का एहसास है माँ
हमारी खुशी मै खुश होती माँ
दुख में हमारे आँसू बहाती
माँ और माँ का प्यार निराला
उसने ही मुझे सँभाला
रचयिता
समरीन,
शिक्षामित्र,
प्राथमिक विद्यालय नं0-2,
विकास खण्ड-पिलखुवा,
जनपद-हापुड़।

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