यही अपील हमारी
आओ मिलकर सभी विचारें,
अपना चिन्तन सहज सुधारें।
शक्तिपुँज हो नारी, रहे नहीं बेचारी।
यही अपील हमारी।
सुनो अपील हमारी।
जनमन जागृत करिए अब,
अभिनव सूत्र समझिए सब।
हो समान व्यवस्था सारी,
नारी भी अधिकारी,
आधी शक्ति हमारी।
यही अपील हमारी।
निर्भय होकर वह प्रगति करेगी,
भागीदारी निज की सतत करेगी।
पढ़ाओ बेटी हर प्यारी,
घर-घर की सुकुमारी,
ममता की उजियारी।
यही अपील हमारी।
हर क्षण ही महिला रहे सुरक्षित,
अधिकारों से हो कभी न वंचित।
बदले सोच हमारी,
उनकी और तुम्हारी,
हो नई चेतना न्यारी।
यही अपील हमारी।
शुभ्र भाव से यह दिवस मनाओ,
संवेदन जागे, कुछ करते जाओ।
करुणावत्सल है नारी,
विकसित पथ सहकारी,
जीवन नींव हमारी।
यही अपील हमारी।।
अपना चिन्तन सहज सुधारें।
शक्तिपुँज हो नारी, रहे नहीं बेचारी।
यही अपील हमारी।
सुनो अपील हमारी।
जनमन जागृत करिए अब,
अभिनव सूत्र समझिए सब।
हो समान व्यवस्था सारी,
नारी भी अधिकारी,
आधी शक्ति हमारी।
यही अपील हमारी।
निर्भय होकर वह प्रगति करेगी,
भागीदारी निज की सतत करेगी।
पढ़ाओ बेटी हर प्यारी,
घर-घर की सुकुमारी,
ममता की उजियारी।
यही अपील हमारी।
हर क्षण ही महिला रहे सुरक्षित,
अधिकारों से हो कभी न वंचित।
बदले सोच हमारी,
उनकी और तुम्हारी,
हो नई चेतना न्यारी।
यही अपील हमारी।
शुभ्र भाव से यह दिवस मनाओ,
संवेदन जागे, कुछ करते जाओ।
करुणावत्सल है नारी,
विकसित पथ सहकारी,
जीवन नींव हमारी।
यही अपील हमारी।।
रचयिता
सतीश चन्द्र "कौशिक"
प्रभारी अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय अकबापुर,
विकास क्षेत्र-पहला,
जनपद -सीतापुर।

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