रंगों का त्योहार है आया

चहुँदिश हर्षोल्लास छाया
रंगों का त्योहार है आया। 

सबके बदन पर रंगबिरंगा ग़ुलाल
हरा, पीला, नीला, नारंगी, लाल
ज्यों ही रंगे प्रेम के रंग में सबके गाल
मिटे गिले-शिकवे और मन के मलाल

चहुँदिश हर्षोल्लास छाया
रंगों का त्यौहार है आया। 

माँ, दीदी, भाभी, ताई
लगे बनाने सभी मिठाई
मठरी, गुझिया, रसमलाई
मिलजुल कर फिर सबने खायी

चहुँदिश हर्षोल्लास छाया
रंगों का त्योहार है आया। 

द्वार-द्वार बच्चे खड़े लिए पिचकारी
राह जो भी निकले उस पर दे मारी
पड़ जाए उन पर रंग की फुहारी
खिलखिलाती हँसी लगे अति प्यारी

चहुँदिश हर्षोल्लास छाया
रंगों का त्योहार है आया। 

अब आयी दही हांडी की बारी
देखने को उमड़ी भीड़ भारी
डी.जे की धुन पर थिरके नर-नारी
यह बेला अति मन भावन और प्यारी।

चहुँदिश हर्षोल्लास छाया
रंगों का त्यौहार है आया।

रचयिता
रीनू पाल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय दिलावलपुर,
विकास खण्ड - देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

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