नारी शक्ति

वो दिए की लौ नहीं, वो मशाल की जलती आग है,
माँ, बहन, पत्नी या बेटी औरत एक चित्र में कई भाग हैं।
वो आवाज़ उठाये तो मलाला और पीटी उषा बन दौड़ लगाई है,
चारों खम्बे हिले हैं तब तब, जब वो हक को सड़कों पर आयी है।
वो विनम्र है तो माँ टेरेसा और रूद्र हो तो रानी लक्ष्मी बाई है।
जब भी मिला खुला आसमान, आँगन की गौरैया गगन चूम के आयी है।
उसकी क्षमता कितनी अधिक, इसका अनुमान किसी को ना है।
हर खेल में सक्षम और देश सुरक्षा में तत्पर पर अभिमान उसे ना है।

रचयिता
अंजली मिश्रा,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरा,
विकास खण्ड-देवमई, 
जनपद-फतेहपुर।

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