होरी कौ त्योहार
बृज मंडल घर - घर मनै, होरी कौ त्योहार,
फाग मास उत्सव बनौ, बढ़े पर्व पै प्यार।
पीपल, लौंग, इलायची, गंधक, राल, कपूर,
पावक होरी की जरै, रोग न झाँकें द्वार।
सब मिल खावें बाँट कै, आवै नयौ अनाज,
चना भून खावै अगर, पावै स्वाद अपार।
गेंदा, चम्पा, मोंगरा, टेसू, फूल - गुलाब,
रंग, अबीर, गुलाल हो, पिचकारी की धार।
दही-चाट, कांजी-बड़ा, मठरी, घृत-पकवान,
ठंडाई बूंटी मिली, गुझिया, मोहन - थार।
आदर ते आदर मिलै, बढ़े प्रेम ते प्रेम,
इन सब ते मिल कै बनै, "वेद" जगत व्यवहार।
रचयिता
विपिन गुप्त 'वेद',
विज्ञान पार्ट टाइम टीचर,
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय छाता,
विकास खण्ड-छाता,
जनपद-मथुरा।
फाग मास उत्सव बनौ, बढ़े पर्व पै प्यार।
पीपल, लौंग, इलायची, गंधक, राल, कपूर,
पावक होरी की जरै, रोग न झाँकें द्वार।
सब मिल खावें बाँट कै, आवै नयौ अनाज,
चना भून खावै अगर, पावै स्वाद अपार।
गेंदा, चम्पा, मोंगरा, टेसू, फूल - गुलाब,
रंग, अबीर, गुलाल हो, पिचकारी की धार।
दही-चाट, कांजी-बड़ा, मठरी, घृत-पकवान,
ठंडाई बूंटी मिली, गुझिया, मोहन - थार।
आदर ते आदर मिलै, बढ़े प्रेम ते प्रेम,
इन सब ते मिल कै बनै, "वेद" जगत व्यवहार।
रचयिता
विपिन गुप्त 'वेद',
विज्ञान पार्ट टाइम टीचर,
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय छाता,
विकास खण्ड-छाता,
जनपद-मथुरा।

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