जल संरक्षण का करो संकल्प

जल का दूजा कोई नहीं विकल्प
 जल संरक्षण का करो संकल्प।

 जल अति शीतल, मधुर, सुयस
 गंध रहित यह पावन अमृत रस।

 उदक, अंबु, नीर और वारि
 इसकी एक-एक बूँद है प्यारी।

 श्रुतिपटल खोल सुन लो दुनिया सारी
 जल को बचाना हमारी जिम्मेदारी।

 तन मन की यह प्यास बुझाता
 ठोस, द्रव, गैस त्रिरूप में पाया जाता।

 कल-कल ध्वनि, रूप मनोहर
 प्रकृति की यह अनुपम धरोहर।

 भूतल में जल सागर गहरा
 शैलों पर हिम बनकर ठहरा।

 मेघ बन नीले अंबर में
 घुमड़-घुमड़ देता पहरा।

 मेघ जब वह जल भू पर बरसाते
 वापी, कूप, कुंड, नद सब भर जाते।

 पेड़-पौधे पुष्प सब खिल जाते
 कृषक बंधु सब खुश हो जाते।

यदि अभी भी हम ना समझें
इसकी उपयोगिता की गहराई।

दूर नहीं वह दिन होगा
होगी जब जल की त्राही-त्राही।

जल ही जीवन है यही सच्चाई
समय शेष है अब अति अल्प।

जल का दूजा कोई नहीं विकल्प
 जल संरक्षण का करो संकल्प।

रचयिता
रीनू पाल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय दिलावलपुर,
विकास खण्ड - देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

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