मकर संक्रांति
जिस मार्ग में प्रकाश स्वरूप अग्नि, दिनाधिपति देवता तथा शुक्लपक्षाधिपति देवता विद्यमान हैं वहीं 6 माह का उत्तरायण है, जिसका अर्थ है उत्तर की ओर चलना बढ़ना भाग्य में वृद्धि का प्रतीक, धर्म शास्त्रों के अनुसार अत्यंत पवित्र माना जाने वाला उत्तरायण का प्रमुख त्योहार मकर संक्रांति।
ब्रह्मांड में नक्षत्र मंडल सदैव सतत् गमनशील हैं। सूर्य, चंद्रमा, समस्त तारे सतत् चलायमानता के प्रतीक हैं। सूर्य का धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश मकर संक्रांति कहलाता है। भारत की संस्कृति का द्योतक एक सूत्र में पिरोने वाला यह उत्सव - संधि पर्व /मकराणी / उतराणी/ पोंगल /मकर संक्रांति/ खिचड़ी कई नामों से जाना जाता है।
ऊर्जामयी रश्मियाँ अपना प्रवास बढ़ाने के साथ-साथ और चहुँओर उत्साह, स्फूर्ति, ऊर्जा, बसंत के आगमन की सूचना लिए, आनन्द की अनुभूति कराती हैं।
तिल-गुड की मिठास,
गंगा स्नान, पुण्य, दान,
पतंग की उडान
यही सब तो हैं मकर संक्रांति की पहचान।
मोनिका सिंह,
सहायक अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय मलवां प्रथम,
विकास खण्ड-मलवां,
जनपद-फतेहपुर।

Bahut khub likha hai Monika
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