स्वामी विवेकानंद
जन्म लिए आज 1863 में,
नरेंद्र नाथ कहलाये थे।
स्वामी रामकृष्ण के सानिध्य में आकर,
स्वामी विवेकानंद नाम पाये थे।।
उठो, जागो, मत रुको कभी,
युवाओं को दिशा दिखाई थी।
लक्ष्य प्राप्ति, नव जागरण की,
उनकी वाणी ने अलख जगाई थी।।
खेलो और कसरत करो,
स्वस्थ शरीर धारण करो।
धर्म-आध्यात्म के आदर्शों सा,
जीवन में आचरण करो।।
उस विद्वान् ने हर कदम पर,
राष्ट्र निर्माण को प्रेरित किया।
इंसानियत है धर्म श्रेष्ठ,
परम ज्ञानी ने ज्ञान दिया।।
पुरातन युग परिवर्तित कर,
नूतन युग आरम्भ किया।
निर्भीक सन्यासी बन चल पड़े,
तज सांसारिक ऐश्वर्य दिया।।
ओ भगवाधारी फिर से आओ,
दुनिया को सत्य की राह दिखाओ।
ओ दिव्य सोच के पावन स्वामी,
हर मन में ज्ञान के दीप जलाओ।।
रचयिता
पूजा सचान,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मसेनी(बालक) अंग्रेजी माध्यम,
विकास खण्ड-बढ़पुर,
जनपद-फर्रुखाबाद।
नरेंद्र नाथ कहलाये थे।
स्वामी रामकृष्ण के सानिध्य में आकर,
स्वामी विवेकानंद नाम पाये थे।।
उठो, जागो, मत रुको कभी,
युवाओं को दिशा दिखाई थी।
लक्ष्य प्राप्ति, नव जागरण की,
उनकी वाणी ने अलख जगाई थी।।
खेलो और कसरत करो,
स्वस्थ शरीर धारण करो।
धर्म-आध्यात्म के आदर्शों सा,
जीवन में आचरण करो।।
उस विद्वान् ने हर कदम पर,
राष्ट्र निर्माण को प्रेरित किया।
इंसानियत है धर्म श्रेष्ठ,
परम ज्ञानी ने ज्ञान दिया।।
पुरातन युग परिवर्तित कर,
नूतन युग आरम्भ किया।
निर्भीक सन्यासी बन चल पड़े,
तज सांसारिक ऐश्वर्य दिया।।
ओ भगवाधारी फिर से आओ,
दुनिया को सत्य की राह दिखाओ।
ओ दिव्य सोच के पावन स्वामी,
हर मन में ज्ञान के दीप जलाओ।।
रचयिता
पूजा सचान,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मसेनी(बालक) अंग्रेजी माध्यम,
विकास खण्ड-बढ़पुर,
जनपद-फर्रुखाबाद।

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