स्वामी विवेकानंद
गगन, धरा भी मुस्काए थे
चहुँदिश छाया था आनंद
जब जन्मे भारत भूमि पर
स्वामी विवेकानंद।
माता भुवनेश्वरी थीं जिसकी
पिता विश्वनाथ दत्त
जन्मा कोलकाता की भूमि पर
भारत माता का भक्त।
रामकृष्ण परमहंस जस गुरु थे जिसके
अमर ज्ञान को जिसने पाया
आत्मसाक्षात्कार स्वामी ने
सन्यासी जीवन अपनाया।
एक बार जो पढ़ा उन्होंने
फिर कभी ना उसको दोहराया
शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में
भारत का परचम लहराया।
जब तक ना लक्ष्य प्राप्ति हो
ना रुकने का संदेश दिया
जातीय और धार्मिक एकता का पाठ,
सबके मन में पिरो दिया।
साहित्य, दर्शन और इतिहास के
थे प्रकांड विद्वान
युवा दिवस के रूप में
समर्पित उनको सम्मान।
ऐसे विलक्षण प्रतिभा से संपन्न व्यक्ति को
मेरा शत-शत प्रणाम
मेरा शत-शत प्रणाम।
रचयिता
रीनू पाल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय दिलावलपुर,
विकास खण्ड - देवमई,
जनपद-फतेहपुर।
चहुँदिश छाया था आनंद
जब जन्मे भारत भूमि पर
स्वामी विवेकानंद।
माता भुवनेश्वरी थीं जिसकी
पिता विश्वनाथ दत्त
जन्मा कोलकाता की भूमि पर
भारत माता का भक्त।
रामकृष्ण परमहंस जस गुरु थे जिसके
अमर ज्ञान को जिसने पाया
आत्मसाक्षात्कार स्वामी ने
सन्यासी जीवन अपनाया।
एक बार जो पढ़ा उन्होंने
फिर कभी ना उसको दोहराया
शिकागो विश्व धर्म सम्मेलन में
भारत का परचम लहराया।
जब तक ना लक्ष्य प्राप्ति हो
ना रुकने का संदेश दिया
जातीय और धार्मिक एकता का पाठ,
सबके मन में पिरो दिया।
साहित्य, दर्शन और इतिहास के
थे प्रकांड विद्वान
युवा दिवस के रूप में
समर्पित उनको सम्मान।
ऐसे विलक्षण प्रतिभा से संपन्न व्यक्ति को
मेरा शत-शत प्रणाम
मेरा शत-शत प्रणाम।
रचयिता
रीनू पाल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय दिलावलपुर,
विकास खण्ड - देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

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