उत्तरायणी मनाते हैं

बाघनाथ की पुण्य धरा पर,
स्नान ध्यान कर आते हैं।
आदित्य हुए उत्तरायण अब,
आओ उत्तरायणी मनाते हैं।

सूरजकुंड में यज्ञोपवीत,
 संगम में स्नान होते हैं,
सरयू गोमती पावन तट पर,
व्याघ्रेश्वर दर्शन पाते हैं।
आओ उत्तरायणी मनाते हैं।

झांकियों से आरंभ मेले का,
झोड़ा, चांचरी, भगनौल गाते हैं,
नाना क्षेत्रों के व्यापारी भी,
मेले की शोभा बढ़ाते हैं,
आओ उत्तरायणी मनाते हैं।।

अपनी फसलों उत्पादन का,
नुमाइश में प्रदर्शन करते हैं,
सरकारी विभाग भी अपने,
उत्पादों की प्रदर्शनी सजाते हैं।
आओ उत्तरायणी मनाते हैं।।

आटे गुड़ से घुघुते बनाकर,
घर-घर घुघुतिया त्योहार मनाते हैं,
घुघुतों की माला गले पहनकर,
बच्चे काले कौआ बुलाते हैं
आओ उत्तरायणी मनाते हैं।।

यही वो क्रांतिकारी धरती है,
जहाँ से हल्ला बोल उठा था,
कुली बेगार, बर्दायश रजिस्टरों को,
सरयू में जब बहा दिया था,
यही वो दिन था यही पर्व था,
भारत माँ के वीरों ने जब,
कुली बेगार आंदोलन छेड़ा था,

गर्व हमें उन सब पर है,
जो ऐसे महा विजेता थे,
इस पावन पर्व पर हम उनको,
श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं।
आओ उत्तरायणी मनाते हैं।।
आओ उत्तरायणी मनाते हैं।।।

रचयिता
हरि शंकर जोशी,
राजकीय कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय थान डंगोली,
विकास क्षेत्र-गरुड़,
जनपद-बागेश्वर,
उत्तराखण्ड। 

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