मकर संक्रांति आई है
मकर संक्रांति आई है
मकर संक्रांति आई है,
झिल-मिल बरखा लाई है।
झूम उठा है खुशी से तन-मन
तिल, लड्डू, खिचड़ी खाई है।
लाल, गुलाबी, काली, नीली,
मिल जुल पतंग उड़ाई है।
गंगा में जब डुबकी लगाई,
तन, मन में शीतलता आई है।
सूरज दादा छुप-छुप जाते,
ये कैसी बदली छाई है।
हाथ जोड़ ईश्वर से माँगो,
जग जीवन कल्याणी हो।
पुण्य कमाओ दान करो सब,
घर-घर में खुशहाली हो।
इंद्र धनुष सा हो सतरंगी,
ये महापर्व जो है मकर संक्रांति
रचयिता
आसिया फ़ारूक़ी,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय अस्ती,
नगर क्षेत्र-फतेहपुर,
जनपद-फतेहपुर।
मकर संक्रांति आई है,
झिल-मिल बरखा लाई है।
झूम उठा है खुशी से तन-मन
तिल, लड्डू, खिचड़ी खाई है।
लाल, गुलाबी, काली, नीली,
मिल जुल पतंग उड़ाई है।
गंगा में जब डुबकी लगाई,
तन, मन में शीतलता आई है।
सूरज दादा छुप-छुप जाते,
ये कैसी बदली छाई है।
हाथ जोड़ ईश्वर से माँगो,
जग जीवन कल्याणी हो।
पुण्य कमाओ दान करो सब,
घर-घर में खुशहाली हो।
इंद्र धनुष सा हो सतरंगी,
ये महापर्व जो है मकर संक्रांति
रचयिता
आसिया फ़ारूक़ी,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय अस्ती,
नगर क्षेत्र-फतेहपुर,
जनपद-फतेहपुर।

Comments
Post a Comment