मकर संक्रान्ति

मौसम में सर्दी है भारी,
बोटी-बोटी कँपी हमारी।
गजक और तिल लड्डू भाते,
थोड़ी सी गर्मी पहुँचाते।
मिल रही शान्ति.....
मकर संक्राति! मकर संक्राति।

सूरज मकर राशि में आया,
दुनिया ने नव जीवन पाया।
शीत घटेगी धीरे-धीरे,
गलन छटेंगी धीरे-धीरे।
कोहरे की भ्रान्ति.....
मकर संक्राति! मकर संक्रान्ति

भोग प्रसाद बनायें खिचड़ी,
गरम-गरम ही भाये खिचड़ी।
मान करें सब खिचड़ी का,
दान करें सब खिचड़ी का।
तन पर हाे कान्ति.....
मकर  संक्रान्ति! मकर संक्रांति

रचयिता
डॉ0 प्रवीणा दीक्षित,
हिन्दी शिक्षिका,
के.जी.बी.वी. नगर क्षेत्र,
जनपद-कासगंज।

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