मुझे कोख में मत मारो माँ

मुझे कोख में मत मारो माँ
तुमसे ही बनी हूँ
तुम में ही ढली हूँ
मैं तुम्हारा ही तो अंश हूँ
मुझे कोख में मत मारो माँ....
अगर इस दुनिया में आऊँगी
घर को स्वर्ग बनाऊँगी
फिर एक दिन आएगा
जब तुम्हारी सबसे प्यारी सखी बन जाऊँगी
तुम्हारी छाया बनकर मैं
जग में नाम कमाऊँगी
मुझे कोख में मत मारो माँ....
पापा से भी बोलो माँ
मुझे अपने आँगन में आने दें
फुदकने दें मुझे चहकने दें
मैं उनकी चिड़िया हूँ
उनके बाग की हर डाली महकाऊँगी
मुझे कोख में मत मारो माँ......
जब तेरा ही टुकड़ा है
बेटा हो या बेटी
फिर मैं क्यों बोझ हूँ
ये भेद क्यों है माँ
मुझे कोख में मत मारो माँ.....
क्या तुम डरती हो
बलात्कार, शोषण और दोहन से
दहेज के लिए जलाने से
सब कुरुतियों से लड़ जाऊँगी
मुझे कोख में मत मारो माँ......

रचयिता
अरूणा कुमारी राजपूत,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय राजपुर(अंग्रेजी़ माध्यम),
विकास खण्ड-सिंभावली, 
जिला-हापुड़।

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