भारत माता के लाल
ये दिन है वीर जवानों का,
जिनके साहस से ये देश बना।
ये दिन है भारत माँ के बेटों का,
जिनके लहू से सुरक्षा की डोर बना।
ये दिन है उन परिवारों का,
जिनके जिगर के टुकड़े कुर्बान हुए।
ये दिन है उन रखवालों के,
जिनके नाम, नमक व निशान हुए।
है ऋणी ये देश उन वीरों का,
जिनके शौर्य से ये भूमि हुई रक्तरंजित।
ये देश है उन मतवालों का,
जिनकी वजह से हैं हम सब जीवित।
है नतमस्तक समूचा देश त्याग पर इनके,
किसी ने खोया बेटा तो किसी ने पिता और पति खोया।
ये बलिदान है सबसे ऊपर,
जिस पर समूचा हिंदुस्तान है रोया।।
रचयिता
अंजली मिश्रा,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरा,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फतेहपुर।
जिनके साहस से ये देश बना।
ये दिन है भारत माँ के बेटों का,
जिनके लहू से सुरक्षा की डोर बना।
ये दिन है उन परिवारों का,
जिनके जिगर के टुकड़े कुर्बान हुए।
ये दिन है उन रखवालों के,
जिनके नाम, नमक व निशान हुए।
है ऋणी ये देश उन वीरों का,
जिनके शौर्य से ये भूमि हुई रक्तरंजित।
ये देश है उन मतवालों का,
जिनकी वजह से हैं हम सब जीवित।
है नतमस्तक समूचा देश त्याग पर इनके,
किसी ने खोया बेटा तो किसी ने पिता और पति खोया।
ये बलिदान है सबसे ऊपर,
जिस पर समूचा हिंदुस्तान है रोया।।
रचयिता
अंजली मिश्रा,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरा,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

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