पतंग और डोर सा रिश्ता

पतंग जैसे गगन की, वादियों तक तुम उठे रहना।
हमारे स्नेह की डोरी भी, अपने संग लिए रहना।।

फासले हों मगर न, प्रीत की डोरी कभी छूटे।
पतंग और डोर सा रिश्ता, दूर होके भी न टूटे।।

 मेरे बच्चों तमन्ना है, आपकी डोर बन जाएँ।
जहाँ देखे तुम्हें दुनिया, वहाँ तक ले तुम्हें जाएँ।।

पंतग सा तुम सजो जा, इस गगन की ऊँची वादी में।
 करो उन्नति दिनों-दिन, तुम ज्ञान-गौरव की वादी में।।

हुआ उत्तरायण सूर्य जैसे, मकर- संक्राति की तिथि पे।
वैसे ही तुम चमकना बच्चों,  हरदम इस प्रगति- पथ पे।।

न गौरव कम तुम्हारा हो, हमारा है यही कहना।
पंतग जैसा गगन की वादियों तक, तुम उठे रहना।।

रचयिता 
महेंद्र सिंह,
अनुदेशक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय कुम्भीपुर,
विकास खण्ड-हथगाम,
जनपद-फतेहपुर।
मो०-+919559197350

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