माँ शारदे

माँ शारदे कहाँ पर, वीणा बजा रही हो?
किस मंजु गान से तुम, मुझको लुभा रही हो?
मैं अज्ञानी बालक, मुझ पर दया तुम करना।
अपनी कृपा तुम मैया, मुझ पर बनाये रखना।
भटके पथिक को जैसे, राहें दिखा रही हो॥
यहाँ पर न कोई, दिखता मेरा सहारा।
दुःख में तड़प रहा मैं, गमों का हूँ मारा।
मिल जाए मैया गर साहिल को किनारा।
हंस पर सवार होके, कहाँ जा रही हो?
माँ शारदे कहाँ पर, वीणा बजा रही हो?
इस अंधकार से तुम, आकर मुझे निकालो।
जीने का तरीका माँ, आकर मुझे सिखा दो।
आत्मा है सोयी मेरा, इसे माँ जगा दो।
औरों को जैसे दुनिया में, आकर जगा रही हो॥
                 
रचयिता
रवीन्द्र शर्मा,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बसवार,
विकास क्षेत्र-परतावल,
जनपद-महराजगंज,उ०प्र०।

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