भारतीय युवाशक्ति के प्रेरक

भारतीय युवाशक्ति के प्रेरक
स्वामी विवेकानंद थे,
प्रतिभा, ज्ञान, आदर्श समेटे
विवेकवान भारतीय थे।
इन्होंने अपने ज्ञान से,
विश्व को चमत्कृत किया।
12 जनवरी 1863 को,
कोलकाता शहर में जन्म लिया।
बचपन का नाम नरेंद्रनाथ था,
अद्भुत प्रतिभा बल इनमें छिपा था।
पिता विश्वनाथ, माता भुनेश्वरी देवी थीं
16 वर्ष की उम्र में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की थी।

आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति को
रामकृष्ण परमहंस की शरण में गए।
उनकी ओजोमयी वाणी सुनकर,
नरेंद्र नाथ  बड़े प्रभावित हुए।
 गुरु परमहंस की मृत्यु के बाद,
धर्म प्रचार-प्रसार के कार्य शुरू किए
सन्यास प्राप्त करने के बाद नरेंद्रनाथ,
विवेकानंद के नाम से विख्यात हुए।
अमेरिका के शिकागो शहर में, सन 1893 में
विश्व धर्म सम्मेलन में प्रतिभाग किया विवेकानंद ने
इनके भाषण को सुनकरके गूँज उठा था सारा हाॅल
तालियों की हुई गड़गड़ाहट, किया ऊँचा भारत का भाल।

कोलकाता में की स्थापना, रामकृष्ण मिशन की।
उठो, जागो और लक्ष्य से पहले मत रुको, शिक्षा दी।
परिश्रम व निरंतर भ्रमण से,
इनका स्वास्थ्य गिरता गया।
युवा शक्ति को नयी चेतना, 
और नया विश्वास दिए
सन 1902 ईसवी में
चिर निंद्रा में सो गए।
विवेकानंद को एक देशभक्त,
संत माना जाता है।
"राष्ट्रीय युवा दिवस" के रूप में,
इनका जन्मदिन मनाया जाता है।

रचयिता
मन्जू शर्मा,
सहायक अध्यापिका, 
प्राथमिक विद्यालय नगला जगराम,
विकास खण्ड-सादाबाद,
जनपद-हाथरस।

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