थल सेना दिवस

थल सेना दिवस
    15 जनवरी

सीमा के प्रहरी बनकर तुम,
माता के ऋण से उऋण हुए।
स्वजनों से दूर सदा रहकर,
तुमने कितने बलिदान दिए।।

जाड़ा गर्मी बर्फीली,
रातों में जाग जाग कर भी।
लक्ष्मण रेखा की आन रखी,
दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए।।

युद्ध अनेकों हुए यहाँ,
पर झुका नहीं माता का सिर।
विश्व प्रसिद्ध है कुमुक हमारी,
बड़ी साहसी बड़ी निडर।।

नभ से, जल से, दूर रहे यह,
माँ के आँचल से प्यार करे।
बुरी नजर डाले यदि कोई,
लक्ष्मण बनकर वार करे।।

भूकंप, बाढ़ या अनावृष्टि,
सूखा, दंगा या बर्फपात।
जब भी माँ पर पड़े आपदा,
सबसे पहले कदम धरे।।

ये कुमुक देश का कोहिनूर,
भारत के सिर पर चमक रहा।
इतिहास रचा है हरदम इसने,
स्वर्णिम पन्नों पर दमक रहा।।

चीन, पाक हो या बंगाल देश,
एल टी टी ई हो या कश्मीर प्रदेश।
सदा तिरंगा फहरा करके,
विश्व को दिया विजय संदेश।।

उस महा कुमुक को मेरा प्रणाम,
भूतल सेना को शत-शत प्रणाम।
अभिनन्दनीय तू वन्दनीय,
स्वीकारो जन-जन के प्रणाम।

रचयिता
बी0 डी0 सिंह,
सहायक अध्यापक,
उच्च प्रथमिक विद्यालय मदुंरी,
विकास खण्ड-खजुहा,
जनपद-फतेहपुर।

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