ये जिंदगी

ये जिंदगी, तुझमें हर रंग है हर ढंग है,
हर संग है, हर रूप है, हर स्वरूप है,
हर धूप है, हर छाँव है, कुछ पल है खुशी,
कुछ पल है गम जिंदगी तुझमें....                       
कुछ पल जीत है, कुछ पल में शिकस्त। 
तू अजब, तू गजब, तू भ्रम पर तू सत्य,
तू अलग, तू विलग तू भेद है, तू अभेद।                                 
जिंदगी.......................   
तू है आज, तू ही कल, जो व्यतीत,
वो अतीत, तू भविष्य, तू ही प्रवास है।
तू परिमाण, परिणाम तू ही। 
 तू ही भार,  तू ही सार जितना कहूँ उतना है कम।                           
जिंदगी.....                             
 तू उदय, तू ही अस्त                   
उदय और अस्त                         
तेरा जो मध्य।                         
बस............. शायद वही है जिंदगी। 

रचयिता
सुमित कुमार मिश्रा, 
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय वीरपुर,
विकास क्षेत्र-मारहरा,
जनपद-एटा।

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