मैं तुमसे ही तो हरा भरा हूँ

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष वचन एक वृक्ष की जुबां से

तुमसे ही है जीवन मेरा
तुमसे ही वर्चस्व मेरा
तुम बिन मेरा होना क्या
दिन रात मैं ये सोच के खड़ा हूँ
 मैं तुमसे ही तो हरा भरा हूँ।।

तुम बिन क्या पानी क्या खाद
तुम बिन क्या काग़ज़ क्या दवात
खोने के लिए सब कुछ मेरे पास
पाने की लालच मे अड़ा हूँ
मैं तुमसे ही तो हरा भरा हूँ

तुमसे ही जिंदा हूँ मैं...
तुम्हारी कुल्हाड़ी का डंडा हूँ मैं
तुम्हारी जरूरत के बहाने ही सही
हर घर मे, हर रूप मे धरा हूँ
 मैं तुमसे ही तो हरा भरा हूँ

तुम्हारे संग अभी बहुत दूर चलना है
तुम्हारे पोते, परपोते से भी मिलना है
मेरे भी बच्चों के बच्चें हो,
इस चाहत को पूरा कर दो,
हाथ जोड़े खड़ा हूँ 
मैं तुमसे ही तो हरा भरा हूँ

रचयिता
मृणाली वर्मा,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय खानपुर,
विकास खण्ड-मिल्कीपुर,
जनपद-अयोध्या।

Comments

  1. कितनी सुन्दर और भावपूर्ण कविता।
    S.kaushik

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  2. बहुत ही अच्छी रचना ,

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  3. Wow beautiful, nice poem
    Pradeep Tiwari
    Senior Librarian GD Goenka Public School Gorakhpur

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