पर्यावरण बचाओ

आज विश्व है हैरान,
करो इसका निदान,
पर्यावरण अपना बचाव रे।
न करो पेड़ों का कटान,
जन-जन को समझाव,
घर-घर पेड़ को लगाव रे।।

कूड़े का सही निपटान करो जी,
आस पास की गन्दगी को दूर करो जी,
नाली ढककर रखो,
मच्छर, मक्खी दूर करो,
मलेरिया, डेंगू बीमारी भगाओ रे।।

तेज ध्वनि से भी अनेंको रोग होंवे,
बहरापन, गूँगापन आदि हो जावे,
न बजाओ तेज हार्न,
कहना अब लो तुम मान,
ध्वनि प्रदूषण से पर्यावरण बचाव रे।।

हम दो और दो होंवे हमारे,
लवकुश अँगना में लगें बड़े प्यारे,
परिवार नियोजन उपाय अपनाव,
जनसंख्या में अंकुश लगाव,
ये बातें अब मान लो...

ये बातें जब होई जाईं
पर्यावरण संतुलन हो जाई
सब होवें खुशहाल
अनुरंजना ..करती आह्वान
पर्यावरण बचाय लो।।

रचयिता
अनुरंजना सिंह,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोठिलिहाई,
जनपद-चित्रकूट।

Comments

  1. समसामयिक, महत्वपूर्ण, प्रशस्थ रचना।
    स०चन्द्र"कौशिक'

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