कह रही धरा

कुछ करो जतन खुश रहने का
          है कहता अम्बर कह रही धरा।
समझो जीवन खुशहाल तभी
       जब स्वस्थ जीव, वन हो हरा।।

जीवन को जो फल देते हैं
               बल देते हैं  विश्वासों  को।
चला रहे दिन-रात दिखा कर
               दया; हमारी साँसों  को।।

जिन पर विहग बसेरा लेते
               जग कलरव से भर देते हैं।
गाते हैं शुभ संध्या - वंदन
          सुबह शंख-ध्वनि कर देते हैं।।

ईंधन औषधि  छाया  देते
          जीवन को सुखमय करते हैं।
सब के सच्चे साथी बनकर
               नया रंग  नित  भरते  हैं।।

उन वृक्षों को कभी न काटो
            समझो उनको बंधु सहोदर।
उनसे जीवन हरा - भरा  है
          जलमय नदियाँ भरे सरोवर।।

दया  दिखाते  हैं जो हम पर
          उन वृक्षों  पर दया दिखाओ।
हो  "प्रयास" अरुण बस इतना
             एक कटे दो-चार लगाओ।

वरना एक दिन आएगा ऐसा
               सब लोग बहुत पछताएँगे।
सारा धन हाथ लेकर ढूंढेंगे
                प्राण वायु पर ना पाएँगे।।

रचनाकार
अरुण कुमार यादव,
उच्च प्राथमिक विद्यालय बरसठी,,
विकास क्षेत्र-बरसठी,
जनपद-जौनपुर।
Mob--9598444853

Comments

Total Pageviews