हरियाली की व्यथा
वृक्ष, नदी, हरियाली, पहाड़ हर कोई रो रहा है,
सुन ओ इंसान, ये कैसा विकास हो रहा है।
वाहनों के चलने से, जनसंख्या के बढ़ने से और प्रदूषण की वृद्धि से,
पर्यावरण का नाश हो रहा है।
सुन ओ इंसान ये कैसा विकास हो रहा है?
वृक्ष, नदी, हरियाली ..................
सूखा, बाढ़, अकाल है कुदरत का आक्रोश,
ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही, बारिश का ह्रास हो रहा है।
सुन ओ इंसान ये कैसा विकास हो रहा है?
वृक्ष, नदी, हरियाली ....................
उद्योगों की आंधी में, वृक्षों की बर्बादी से,
जल्द धरा मिट जाएगी, ऐसा आभास हो रहा है।
सुन ओ इंसान ये कैसा विकास हो रहा है?
वृक्ष, नदी, हरियाली .....................
अभी वक्त है चेत जा मानव, मेरी रक्षा कर ले,
कुदरत से खिलवाड़ पर ही तॊ, तेरा विनाश हो रहा है।
सुन ले ओ इंसान ये कैसा विकास हो रहा है?
वृक्ष, नदी, हरियाली, पहाड़ हर कोई रो रहा है।
सुन ओ इंसान ये कैसा विकास हो रहा है?
रचयिता
गीता यादव,
प्रधानाध्यपिका,
प्राथमिक विद्यालय मुरारपुर,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फ़तेहपुर।
सुन ओ इंसान, ये कैसा विकास हो रहा है।
वाहनों के चलने से, जनसंख्या के बढ़ने से और प्रदूषण की वृद्धि से,
पर्यावरण का नाश हो रहा है।
सुन ओ इंसान ये कैसा विकास हो रहा है?
वृक्ष, नदी, हरियाली ..................
सूखा, बाढ़, अकाल है कुदरत का आक्रोश,
ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही, बारिश का ह्रास हो रहा है।
सुन ओ इंसान ये कैसा विकास हो रहा है?
वृक्ष, नदी, हरियाली ....................
उद्योगों की आंधी में, वृक्षों की बर्बादी से,
जल्द धरा मिट जाएगी, ऐसा आभास हो रहा है।
सुन ओ इंसान ये कैसा विकास हो रहा है?
वृक्ष, नदी, हरियाली .....................
अभी वक्त है चेत जा मानव, मेरी रक्षा कर ले,
कुदरत से खिलवाड़ पर ही तॊ, तेरा विनाश हो रहा है।
सुन ले ओ इंसान ये कैसा विकास हो रहा है?
वृक्ष, नदी, हरियाली, पहाड़ हर कोई रो रहा है।
सुन ओ इंसान ये कैसा विकास हो रहा है?
रचयिता
गीता यादव,
प्रधानाध्यपिका,
प्राथमिक विद्यालय मुरारपुर,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फ़तेहपुर।

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