पर्यावरण दिवस

1

वृक्षारोपण करें, हरें हम धरती का दूषण।
वृक्ष लगाकर दूर करें हम पर्यावरण प्रदूषण।।

वसुंधरा को शीतल छाया वृक्ष हमेशा देते,
अच्छे मानव बच्चों जैसे पेड़ों को हैं सेते।

वृक्षों से ही हमको मिलते सब सुविधा साधन,
इसलिए वृक्षों को कहतें हैं धरती का भूषण।

वृक्ष लगाकर दूर करें हम पर्यावरण प्रदूषण।

वृक्षों से ही मिलती हमको, शुद्ध वायु  ऑक्सीजन।
वृक्षों से ही रुकती है, उर्वर मृदा क्षरण।

इसलिए वृक्षों को कहते हैं, धरती का भूषण।।

वृक्षारोपण करें, हरें हम धरती का दूषण,
वृक्ष लगाकर दूर करें हम पर्यावरण प्रदूषण।

2

पर्यावरण बचायेंगे


आज प्रतिज्ञा लेते हैं, पर्यावरण बचायेंगे।
आज प्रतिज्ञा लेते हैं, धरती स्वर्ग बनायेंगे।।

वृक्ष काटना पाप है, जीवन का अभिशाप है।
वृक्ष धरा के भूषण हैं, करते दूर प्रदूषण हैं।।

आज प्रतिज्ञा लेते हैं, अच्छी राह दिखायेंगे।
आज प्रतिज्ञा लेते हैं, पर्यावरण बचायेंगे।।

वृक्ष हमें फल देते हैं, छाया शीतल देते हैं।
वृक्षों से धरती सजती है, वृक्षों से शोभा बढ़ती है।।

सबको यही सिखायेंगे, पर्यावरण बचायेंगे।
आज प्रतिज्ञा लेते हैं, धरती स्वर्ग बनायेंगे।

चारों दिशि हरियाली हो, धरती पर खुशहाली हो।
आओ! मिल कर जतन करें, हरा-भरा हर चमन करें।

आज प्रतिज्ञा लेते हैं, उन्नत देश बनायेंगे।
आज प्रतिज्ञा लेते हैं, पर्यावरण बचायेंगे।

वृक्ष हमें फल देते हैं, वृक्ष हमें बल देते हैं।
वृक्षों का सम्मान करें, इनका पूरा ध्यान करें।।

आज प्रतिज्ञा लेते हैं,धरोहर ये बचायेंगे।
आज प्रतिज्ञा लेते  हैं, पर्यावरण बचायेंगे।

करते दूर व्याधियाँ हैं, देते सब औषधियाँ हैं।
प्राण वायु ये देते हैं, सारा दुख हर लेते हैं।।

दस-दस पेड़ लगायेंगे, धरती स्वर्ग बनायेंगे।
आज प्रतिज्ञा लेते हैं, पर्यावरण बचायेंगे।

रचयिता
डॉ0 प्रवीणा दीक्षित,
हिन्दी शिक्षिका,
के.जी.बी.वी. नगर क्षेत्र,
जनपद-कासगंज।

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