माँ का वंदन
हे माँ पावन महिमामयी महान,
दे दो कृपामयी शुभ वरदान।
भारत भू के विस्तृत अंचल पर,
हों जाएँ सब सुखमय और महान।
ज्ञान और विज्ञान की धारा फैले,
सद्बुद्धि सभी में नित-नित फैले।
मानवता का हो गान नया अब,
जन-जन के जीवन का हो उत्थान।
सबमें पुरुषार्थ जगाओ अनुपम,
दिखे सृजन का पथ सर्वोत्तम।
समता, करुणा, न्याय नीति का,
माँ कर दो सुखमय एक विहान।
प्रज्ञा प्रखर प्रबलतम अन्तर हो
शुचिता मुदिता जीवन भर हो।
सेवा के पथ पर बढ़ें समर्पित,
और मातृशक्ति का हो सम्मान।
रचयिता
सतीश चन्द्र "कौशिक"
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अकबापुर,
विकास क्षेत्र-पहला,
जनपद -सीतापुर।
दे दो कृपामयी शुभ वरदान।
भारत भू के विस्तृत अंचल पर,
हों जाएँ सब सुखमय और महान।
ज्ञान और विज्ञान की धारा फैले,
सद्बुद्धि सभी में नित-नित फैले।
मानवता का हो गान नया अब,
जन-जन के जीवन का हो उत्थान।
सबमें पुरुषार्थ जगाओ अनुपम,
दिखे सृजन का पथ सर्वोत्तम।
समता, करुणा, न्याय नीति का,
माँ कर दो सुखमय एक विहान।
प्रज्ञा प्रखर प्रबलतम अन्तर हो
शुचिता मुदिता जीवन भर हो।
सेवा के पथ पर बढ़ें समर्पित,
और मातृशक्ति का हो सम्मान।
रचयिता
सतीश चन्द्र "कौशिक"
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय अकबापुर,
विकास क्षेत्र-पहला,
जनपद -सीतापुर।

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