ईद

ईद का दिन आया है,
खुशियाँ संग लाया है।

रमज़ान माह बाद ईद है आती,
महीने भर रोजे के बाद है आती।

मस्जिद में नमाज़ हैं पढ़ते,
मिलकर दुआ हैं पढ़ते।

एक दूजे के गले हूं मिलते,
मिलन का संदेश है देते।

गरीबों की मदद हैं करते,
जमकर खरीदारी भी करते।

बच्चों में उमंग है  छाए,
नए नए कपड़े पहन मुस्काए।

मेला मिलकर घूमने जाएँ,
मौज मस्ती खूब मनाएँ।

मिठाई, सेवईयाँ मिलकर खाएँ,
एक दूजे के घर मिलने जाएँ।

गले मिलकर प्यार जताएँ,
बधाइयाँ भी देते जाएँ।

ईद है खुशियों का मेला,
हर कोई है इसमें झूमा।

समाज में भाईचारा है बढ़ता,
प्रेम और सौहार्द है बढ़ता।

ईद का दिन आया है,
खुशियाँ संग लाया है।

रचयिता
रीना सैनी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय गिदहा,
विकास खण्ड-सदर,
जनपद -महाराजगंज।

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