वसुधा स्वर्ग दिखाई दे
हरियाली फैले वसुधा पर,
प्राणवायु की कमी न हो।
बंजर हो जाए यह वसुधा,
ऐसा यहाँ पर कभी न हो।
वृक्षारोपण कर लो भइया,
वसुधा स्वर्ग दिखाई दे।।
रोती बिलखती वसुधा पुकारे,
अब मुझको नहीं सताओ।
पर्यावरण संरक्षण कर लो,
जन-जन वृक्ष लगाओ।
प्रदूषण खत्म करो सब मिलकर,
वसुधा स्वर्ग दिखाई दे।।
रक्षक बन जाओ जीवों के,
भक्षक कभी नहीं बनना।
सरिताओं को निर्मल करके,
हम सबको है खुश रहना।
पर्यावरण संरक्षित कर लो,
वसुधा स्वर्ग दिखाई दे।।
एक वृक्ष दस पुत्र बराबर,
इस बात को शास्त्र बताते हैं।
आओ हम सब मिलकरके,
वृक्षों को खूब लगाते हैं।
नही उजाड़ेंगे जंगल को,
वसुधा स्वर्ग दिखाई दे।।
संकल्प करेंगे हम सब मिलकर,
पर्यावरण को स्वच्छ बनाएँगे।
जीव जगत हैं मित्र हमारे,
अब इनको नही सताएँगे।
हरियाली फैलाओ सब जन,
वसुधा स्वर्ग दिखाई दे।।
रचयिता
अशोक कुमार,
सहायक अध्यापक,
कम्पोजिट प्राथमिक विद्यालय रामपुर कल्याणगढ़,
विकास खण्ड-मानिकपुर,
जनपद-चित्रकूट।
प्राणवायु की कमी न हो।
बंजर हो जाए यह वसुधा,
ऐसा यहाँ पर कभी न हो।
वृक्षारोपण कर लो भइया,
वसुधा स्वर्ग दिखाई दे।।
रोती बिलखती वसुधा पुकारे,
अब मुझको नहीं सताओ।
पर्यावरण संरक्षण कर लो,
जन-जन वृक्ष लगाओ।
प्रदूषण खत्म करो सब मिलकर,
वसुधा स्वर्ग दिखाई दे।।
रक्षक बन जाओ जीवों के,
भक्षक कभी नहीं बनना।
सरिताओं को निर्मल करके,
हम सबको है खुश रहना।
पर्यावरण संरक्षित कर लो,
वसुधा स्वर्ग दिखाई दे।।
एक वृक्ष दस पुत्र बराबर,
इस बात को शास्त्र बताते हैं।
आओ हम सब मिलकरके,
वृक्षों को खूब लगाते हैं।
नही उजाड़ेंगे जंगल को,
वसुधा स्वर्ग दिखाई दे।।
संकल्प करेंगे हम सब मिलकर,
पर्यावरण को स्वच्छ बनाएँगे।
जीव जगत हैं मित्र हमारे,
अब इनको नही सताएँगे।
हरियाली फैलाओ सब जन,
वसुधा स्वर्ग दिखाई दे।।
रचयिता
अशोक कुमार,
सहायक अध्यापक,
कम्पोजिट प्राथमिक विद्यालय रामपुर कल्याणगढ़,
विकास खण्ड-मानिकपुर,
जनपद-चित्रकूट।

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