हिन्दी तुझको अमर प्रणाम
हे निज भाषा हिन्दी तुझको, सबका अमर प्रणाम है।
तू ही है आधारशिला, तू हम सब की पहचान है।।
तू ही जननी भाषाओं की, हर भाषा की जान है।
तू ही तो हर मुख की शोभा, तू भारत की शान है।
तू है पावन, सरल-सहोदर, तुझमें रसों की खान है।
अलंकरित तू छंद-पूर्ण, तेरी गरिमा सकल जहान है।
हर भारतवासी के मन में, तू ही सबकी प्रान है।
कैसे गाथा गाये कोई, महिमा तेरी महान है।
भारत की तो बात अलग है, विश्व करे गुणगान है।
हे निज भाषा हिन्दी तुझको, सबका अमर प्रणाम है।
रचयिता
महेंद्र सिंह,
अनुदेशक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय कुम्भीपुर,
विकास खण्ड-हथगाम,
जनपद-फतेहपुर।
मो०-+919559197350
तू ही है आधारशिला, तू हम सब की पहचान है।।
तू ही जननी भाषाओं की, हर भाषा की जान है।
तू ही तो हर मुख की शोभा, तू भारत की शान है।
तू है पावन, सरल-सहोदर, तुझमें रसों की खान है।
अलंकरित तू छंद-पूर्ण, तेरी गरिमा सकल जहान है।
हर भारतवासी के मन में, तू ही सबकी प्रान है।
कैसे गाथा गाये कोई, महिमा तेरी महान है।
भारत की तो बात अलग है, विश्व करे गुणगान है।
हे निज भाषा हिन्दी तुझको, सबका अमर प्रणाम है।
रचयिता
महेंद्र सिंह,
अनुदेशक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय कुम्भीपुर,
विकास खण्ड-हथगाम,
जनपद-फतेहपुर।
मो०-+919559197350

Comments
Post a Comment