भारत माता तुम्हें प्रणाम

चन्द लोग निज स्वार्थ में, माँ का करते हैं नुकसान।
अपने ही बनाये घर को, बना रहे हैं सब श्मशान।।

जलता देख कलेजा माँ का, क्यों नहीं वे होते हैं हैरान।
माँ के जलने से क्या हासिल, कुछ तो समझो अरे! शैतान।।

चुन-चुन कर इस घर को बनाया, गरीब, किसान और जवान।
सैकड़ों वीरों की कुर्बानियों से बना, हमारा प्यारा ये हिंदुस्तान।।

हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई, सभी की है इसमें शान।
तपती, जमती भारत माँ की, रक्षा करते हैं वीर जवान।।

कुछ शर्म करो, कुछ शर्म करो, माँ की गोदी में पले मानव।
मत आओ बहकावे में तुम, कुछ करके करो देश का नाम।।

भारत माँ का कर्ज चुका कर, कुछ करो ऐसा नेक काम।
जिससे इस जग में तुम्हारा, चारों दिशाओं में हो नाम।।

बूढ़ा, बच्चा,जवान पढ़ाओ।
देश में शिक्षा का दीप जलाओ।
यही है ए.एल.का काम।
माँ तुम्हें प्रणाम।।

रचयिता
अशर्फी लाल सिंह,
प्रधानाध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोल गदहिया, 
विकास क्षेत्र व जनपद-चित्रकूट।

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