नववर्ष मंगल कर दो
हे नव प्रभात के सूर्य उदय
हे प्रथम भोर की सूर्य किरण।
तुम धूप बन हर घर आँगन चले आना,
जहाँ-जहाँ अँधकार विद्यमान है,
वहाँ-वहाँ प्रकाश छटा बिखरा आना।।
हे वन उपवन के पुष्प तुम।
तुम भी जरा आगे आ जाना।
अपनी मनमोहक सुगंध से।
प्रकृति का श्रृंगार करा आना।।
हे अदृश्य समीर तुम।
तुम भी शीतलता अहसास करा देना।।
हे नील श्याम अम्बर तुम।।
तुम भी नीर जीवन संग।।
अपनी बाँहों को फैला देना।।।
कोयल बया खग तुम भी सुन लो।
तुम अब पीछे न रह जाना।।
मधुर गुँजन संगीत से।।
ये जीवन गुँजायमान करा आना।।।
हे अनंत प्रकृति पूर्ण करो अभिलाषा।।
मन तरंग उमंग भर दो।
नववर्ष मंगलमय कर दो।।।।
रचयिता
सुमित कुमार मिश्रा,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय वीरपुर,
विकास क्षेत्र-मारहरा,
जनपद-एटा।
हे प्रथम भोर की सूर्य किरण।
तुम धूप बन हर घर आँगन चले आना,
जहाँ-जहाँ अँधकार विद्यमान है,
वहाँ-वहाँ प्रकाश छटा बिखरा आना।।
हे वन उपवन के पुष्प तुम।
तुम भी जरा आगे आ जाना।
अपनी मनमोहक सुगंध से।
प्रकृति का श्रृंगार करा आना।।
हे अदृश्य समीर तुम।
तुम भी शीतलता अहसास करा देना।।
हे नील श्याम अम्बर तुम।।
तुम भी नीर जीवन संग।।
अपनी बाँहों को फैला देना।।।
कोयल बया खग तुम भी सुन लो।
तुम अब पीछे न रह जाना।।
मधुर गुँजन संगीत से।।
ये जीवन गुँजायमान करा आना।।।
हे अनंत प्रकृति पूर्ण करो अभिलाषा।।
मन तरंग उमंग भर दो।
नववर्ष मंगलमय कर दो।।।।
रचयिता
सुमित कुमार मिश्रा,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय वीरपुर,
विकास क्षेत्र-मारहरा,
जनपद-एटा।

सुन्दर शब्दों का चयन किया गया है । बधाई हो आपको
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