स्वामी विवेकानंद
भारतीय दर्शन को नव रूप दिया, वो व्यक्ति महान था,
स्वामी जग में कहलाये, नरेंद्र नाथ दत्त नाम था।
जनवरी बारह, सन अठ्ठारह सौ तिरसठ, में जन्म लिया,
कलकत्ता के कुलीन बंगाली, कायस्थ परिवार को धन्य किया।
वेदांतों के आध्यात्मिक गुरु, बनकर जग में ख्याति पायी,
परमहंस के शिष्य बनकर, भारतीय दर्शन की दीक्षा पायी।
सब जीवों में ईश्वर के, अस्तित्व की बातें जब जानी,
जगत चराचर की सेवा करने की, फिर मन में ठानी।
मिशन रामकृष्ण की स्थापना कर, जगत का भ्रमण किया,
भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का, देश विदेश प्रचार किया।
वेदांत सोसायटी और रामकृष्ण मठ की भी फिर नींव धरी,
पाश्चात्य संस्कृति छोड़, युवाओं में नवऊर्जा भरी।
वेद, योग का बता महात्म्य, पश्चिमी देशों में प्रचार किया।
स्वयं भूखे रहकर भी, अतिथि का सत्कार किया।
सन अट्ठारह सौ तिरानवे में, वस्त्र गेरूवा धारण किया,
विश्व धर्म सम्मेलन में अमेरिका में प्रतिभाग किया।
प्रतिनिधित्व से हिन्दू धर्म को, श्रेष्ठ धर्म की ख्याति मिली,
विश्व जगत में भारत देश को, सार्वभौमिक पहचान मिली।
भ्रमण देश-विदेश का करके, पीठों की स्थापना की,
भारतीय तत्वज्ञान की ज्योति, जन-जन को प्रदान की।
वक्तव्य शैली व ज्ञान से अपने, अमेरिका को किया प्रभावित,
"साइक्लोनिक हिन्दू" की उपाधि से, मीडिया ने किया सम्मानित।
भारतीय संस्कृति का जिस महान ने, पुनः किया उद्धार था,
चार जनवरी सन उन्नीस सौ दो को, अल्पायु में किया देहत्याग था।
रचयिता
सुप्रिया सिंह,
इं0 प्र0 अ0,
प्राथमिक विद्यालय-बनियामऊ 1,
विकास क्षेत्र-मछरेहटा,
जनपद-सीतापुर।
स्वामी जग में कहलाये, नरेंद्र नाथ दत्त नाम था।
जनवरी बारह, सन अठ्ठारह सौ तिरसठ, में जन्म लिया,
कलकत्ता के कुलीन बंगाली, कायस्थ परिवार को धन्य किया।
वेदांतों के आध्यात्मिक गुरु, बनकर जग में ख्याति पायी,
परमहंस के शिष्य बनकर, भारतीय दर्शन की दीक्षा पायी।
सब जीवों में ईश्वर के, अस्तित्व की बातें जब जानी,
जगत चराचर की सेवा करने की, फिर मन में ठानी।
मिशन रामकृष्ण की स्थापना कर, जगत का भ्रमण किया,
भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का, देश विदेश प्रचार किया।
वेदांत सोसायटी और रामकृष्ण मठ की भी फिर नींव धरी,
पाश्चात्य संस्कृति छोड़, युवाओं में नवऊर्जा भरी।
वेद, योग का बता महात्म्य, पश्चिमी देशों में प्रचार किया।
स्वयं भूखे रहकर भी, अतिथि का सत्कार किया।
सन अट्ठारह सौ तिरानवे में, वस्त्र गेरूवा धारण किया,
विश्व धर्म सम्मेलन में अमेरिका में प्रतिभाग किया।
प्रतिनिधित्व से हिन्दू धर्म को, श्रेष्ठ धर्म की ख्याति मिली,
विश्व जगत में भारत देश को, सार्वभौमिक पहचान मिली।
भ्रमण देश-विदेश का करके, पीठों की स्थापना की,
भारतीय तत्वज्ञान की ज्योति, जन-जन को प्रदान की।
वक्तव्य शैली व ज्ञान से अपने, अमेरिका को किया प्रभावित,
"साइक्लोनिक हिन्दू" की उपाधि से, मीडिया ने किया सम्मानित।
भारतीय संस्कृति का जिस महान ने, पुनः किया उद्धार था,
चार जनवरी सन उन्नीस सौ दो को, अल्पायु में किया देहत्याग था।
रचयिता
सुप्रिया सिंह,
इं0 प्र0 अ0,
प्राथमिक विद्यालय-बनियामऊ 1,
विकास क्षेत्र-मछरेहटा,
जनपद-सीतापुर।

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