सच्चा एक नाम पाया
26 दिसम्बर 1666 को जन्मा एक तारा था
किया पावन पटना को बना एक सितारा था।
पिता तेग बहादुर माता गुज़री का वह लाल था
नाम था गोविन्द राय वीरता पर न कोई सवाल था।
शान्ति, क्षमा, सहनशीलता का गुण बेमिसाल था
पिता तेग बहादुर की शहादत का कोई न हिसाब था।
अजीत, ज़ोरावर, नुसार व फतेह जैसे 4 शहज़ादे
जिन्होंने प्राण देकर भी बदले न अपने इरादे।
की खालसा पंथ की स्थापना, बनाये पंच प्यारे
जो बने अपने गुरु के लिए बहुत ही न्यारे।
गुरु गोविन्द जैसा प्रकाश पुँज जल्द विलीन हो गया
7 अक्टूबर 1708 को दिव्यज्योति में लीन हो गया।।
रचयिता
इला सिंह,
सहायक अध्यापिका,
कम्पोजिट विद्यालय पनेरुआ,
विकास खण्ड-अमौली,
जनपद-फ़तेहपुर।
किया पावन पटना को बना एक सितारा था।
पिता तेग बहादुर माता गुज़री का वह लाल था
नाम था गोविन्द राय वीरता पर न कोई सवाल था।
शान्ति, क्षमा, सहनशीलता का गुण बेमिसाल था
पिता तेग बहादुर की शहादत का कोई न हिसाब था।
अजीत, ज़ोरावर, नुसार व फतेह जैसे 4 शहज़ादे
जिन्होंने प्राण देकर भी बदले न अपने इरादे।
की खालसा पंथ की स्थापना, बनाये पंच प्यारे
जो बने अपने गुरु के लिए बहुत ही न्यारे।
गुरु गोविन्द जैसा प्रकाश पुँज जल्द विलीन हो गया
7 अक्टूबर 1708 को दिव्यज्योति में लीन हो गया।।
रचयिता
इला सिंह,
सहायक अध्यापिका,
कम्पोजिट विद्यालय पनेरुआ,
विकास खण्ड-अमौली,
जनपद-फ़तेहपुर।

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