हे प्रथम शिक्षिका तुम्हें नमन
हे प्रथम शिक्षिका तुम्हें नमन,
श्रध्दा के सुमन तुम्हें अर्पण।
तुमने जो कार्य किए हे माँ,
आभारी उसके शिक्षक गण।
नारी जग की आधार-शिला,
सिमटी थी घर के कोने में।
तुमने कोटि संघर्ष किया,
उसे घर से बाहर लाने में।
नारी शिक्षा की राह चुनी,
भारत की उन्नति के खातिर।
पहला विद्यालय खोल दिया,
बेटी के पढने के खातिर।
जब निकल पड़ी बेटी घर से,
भारत में परिवर्तन आया।
होकर शिक्षित फिर बेटी ने,
भारत का घर-घर चमकाया।
नारी के बुझते जीवन को,
तुमने नव जीवन दान दिया।
दी तोड़ रूढ़ियों की बेड़ी,
नारी को नयी पहचान दिया।
नारी-शिक्षा का महल बना,
जब तुमने जोड़ा था कण-कण।
तुमने जो कार्य किए हे माँ,
आभारी उसके शिक्षक गण।
हे प्रथम शिक्षिका तुम्हें नमन,
श्रध्दा के सुमन तुम्हें अर्पण।
रचयिता
महेंद्र सिंह,
अनुदेशक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय कुम्भीपुर,
विकास खण्ड-हथगाम,
जनपद-फतेहपुर।
मो०-+919559197350
श्रध्दा के सुमन तुम्हें अर्पण।
तुमने जो कार्य किए हे माँ,
आभारी उसके शिक्षक गण।
नारी जग की आधार-शिला,
सिमटी थी घर के कोने में।
तुमने कोटि संघर्ष किया,
उसे घर से बाहर लाने में।
नारी शिक्षा की राह चुनी,
भारत की उन्नति के खातिर।
पहला विद्यालय खोल दिया,
बेटी के पढने के खातिर।
जब निकल पड़ी बेटी घर से,
भारत में परिवर्तन आया।
होकर शिक्षित फिर बेटी ने,
भारत का घर-घर चमकाया।
नारी के बुझते जीवन को,
तुमने नव जीवन दान दिया।
दी तोड़ रूढ़ियों की बेड़ी,
नारी को नयी पहचान दिया।
नारी-शिक्षा का महल बना,
जब तुमने जोड़ा था कण-कण।
तुमने जो कार्य किए हे माँ,
आभारी उसके शिक्षक गण।
हे प्रथम शिक्षिका तुम्हें नमन,
श्रध्दा के सुमन तुम्हें अर्पण।
रचयिता
महेंद्र सिंह,
अनुदेशक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय कुम्भीपुर,
विकास खण्ड-हथगाम,
जनपद-फतेहपुर।
मो०-+919559197350

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