संकल्प-2020
ये मन बड़ा चञ्चल है।
नदिया जैसा अविरल है।।
रोकूँ मैं इसे कैसे;
ये लगता अब तो प्रबल है।।
दुनिया में जो आये हैं।
अधिकतर मतलबी पाए हैं।।
मैं बदलूँ इन्हें कैसे;
ये तो मजहबी चश्मा, चढ़ाए हैं।।
हमें नैतिकता की खातिर;
सोच बदलनी होगी।।
मिट जाएँ विषाद सभी के;
मुक्ति निज-स्वार्थ की दिलानी होगी।।
कर्म-युद्ध और धर्म-युद्ध का;
रोपित बीज उगाना होगा।।
छल-कपट की राजनीति को:
अब बन्द कराना होगा।।
तब मिल सबके ये भारत;
विश्व-गुरू कहलाएगा।।
पाक की तो बात छोड़ो;
चीन, अमरीका घुटनों के बल आएगा।।
गर, हम चाहें शुरू वर्ष के;
लें संकल्प महान।।
जुटें 'मन' से कहलाएँ चालीसा;
वर्ष 2020 को बनाएँ समान।।
(एक मन =40किलो, वर्ष2020, 20+20=40 अर्थात मन माफिक नवीन भारत की तरक्की)
रचयिता
नरेन्द्र सैंगर,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बरकातपुर,
विकास खण्ड-धनीपुर,
जनपद-अलीगढ़।
नदिया जैसा अविरल है।।
रोकूँ मैं इसे कैसे;
ये लगता अब तो प्रबल है।।
दुनिया में जो आये हैं।
अधिकतर मतलबी पाए हैं।।
मैं बदलूँ इन्हें कैसे;
ये तो मजहबी चश्मा, चढ़ाए हैं।।
हमें नैतिकता की खातिर;
सोच बदलनी होगी।।
मिट जाएँ विषाद सभी के;
मुक्ति निज-स्वार्थ की दिलानी होगी।।
कर्म-युद्ध और धर्म-युद्ध का;
रोपित बीज उगाना होगा।।
छल-कपट की राजनीति को:
अब बन्द कराना होगा।।
तब मिल सबके ये भारत;
विश्व-गुरू कहलाएगा।।
पाक की तो बात छोड़ो;
चीन, अमरीका घुटनों के बल आएगा।।
गर, हम चाहें शुरू वर्ष के;
लें संकल्प महान।।
जुटें 'मन' से कहलाएँ चालीसा;
वर्ष 2020 को बनाएँ समान।।
(एक मन =40किलो, वर्ष2020, 20+20=40 अर्थात मन माफिक नवीन भारत की तरक्की)
रचयिता
नरेन्द्र सैंगर,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बरकातपुर,
विकास खण्ड-धनीपुर,
जनपद-अलीगढ़।

Comments
Post a Comment