स्वर की कहानी

-है सबसे पहले आता,
क्योंकि यह है स्वर का राजा।
 -की क्यों हो न बड़ाई,
क्योंकि ये है अ का बड़ा भाई।
 -ई से है छोटी,
लेकिन ये है स्वर की माला का मोती।
 -के बिन पूरी न हो पूरी कहानी,
क्योंकि ये है स्वर की रानी।
 -उ-उ-उ, उ-उ-उ,
ई के बाद और ऊ से पहले मैं ही हूँ।
 -मुझे मत समझो अकेला यार,
मुझे है उ से बहुत ही प्यार।
ऋ -है यारों बड़ा महान,
यह है ऋषियों की पहचान।
 -कहो मुझे प्यार से भाई,
क्योंकि मैं भी हूँ स्वर की इकाई।
 -ए को जो करता है प्यार,
ऐ भी रखे उसका ख्याल।
 -आ के सर पर एक छड़ी लगाई,
आ देखो  बन गया भाई।
 -की बस है यही कहानी,
ओ से यह है थोड़ा भारी।
अं -स्वर का राजा जब तिलक लगाये,
तब वह अ की जगह अं कहलाये।
अः -अब थक गये क्या मेरे भाई,
अभी तो अः की बारी आई।

रचयिता
नीलम चौहान,
सहायक अध्यापक,
अभिनव प्राथमिक विद्यालय कुल्हनमऊ खास,
विकास क्षेत्र-सिकरारा, 
जनपद-जौनपुर।

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