अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक,50,कंचन कश्यप ,अम्बेडकर नगर
*👩🏻🏫अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक*
*मिशन शिक्षण संवाद परिवार की बहनों की संघर्ष और सफ़लता की कहानी*
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*👩👩👧👧महिला सशक्तीकरण- 50*
(दिनाँक- 22 अप्रैल 2019)
नाम कंचन कश्यप
पद -सहायक अध्यापक
विद्यालय -मॉडल इंग्लिश मीडियम जैतपुर निधियावां भीटी अम्बेडकर नगर
सफलता एवं संघर्ष की कहानी :-
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नियुक्ति वर्ष 21 मार्च 2015
वर्तमान 2 अप्रैल 2018
*"आलोचकों को पीछे छोड़कर मुझे,सूरज की तरह चमकना है |*
*भगवान ने हीरा बना कर भेजा मुझे ,बस शर्त यह है कि घिसेगातभी चमकेगा"|*
*"स्वीकार करने की हिम्मत और सुदर करने की नीयत हो तो ,हम बहुत कुछ कर सकते है|"*
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*हम शिक्षक है,शिक्षा प्रदान करना ही हमारा परम कर्तव्य है|*
*"चलो, चले शिक्षा दीप जला ले,आवाज़ उठा ले,क़ि नया चला आ रहा हैं|"*
बच्चो को उनकी अंर्तनिहित शक्तियों का ज्ञान कराकर उनके अंदर आत्मविश्वास जागृत करना | समय समय पर विभिन्न कायर्क्रम का आयोजन करवाना|उन कार्यक्रमो से सम्बंधित प्रतियोगिता करवाना एवं बच्चो को पुरस्कृत करना| विद्यालय परिसर में बालिका शिक्षा से सम्बंधित गोष्ठी का आयोजन किया जाना| महापर्वो से सम्बंधित त्यौहार का आयोजन ,कला, मेहँदी क्राफ्ट से वस्तुये तैयार करवाना| छात्र एवं छात्रो के बहुमुखी विकास के किया विभिन शिक्षण संबंधी गतिविधियों का आयोजन किया गया|
आज मिशन शिक्षण संवाद के महिला सशक्तीकरण के विशेषांक के कारण मुझे अपने कार्यभार ग्रहण करने से लेकर अब तक का सफर साझा करने का अवसर प्रदान हुआ|
मैं कंचन कश्यप (स अ) मॉडल इंग्लिश मीडियम प्राइमरी स्कूल जैतपुर निधियावां भीटी अम्बेडकर नगर ,9 महीने की छोटी से बच्ची को ले कर कार्यभार ग्रहण करना ,घर से हज़ारों किलोमीटर की दूरी तय करते हुए परिवार से दूर होकर वर्तमान तक दो विद्यालयो में कार्य करते हुए वक्त ने अच्छे और बुरे की पहचान और बहुत कुछ सिख दिया । जो की बहुत कम उम्र में सीखने को मिला। इन सबका श्रेय मेरे माता पिता को जाता है इनकी आशीर्वाद से ये सम्मानित ओहदा मिला । पति के साथ मेरे भाई बहन का बहुत ही अच्छा साथ मिला जो मुझे कठिन परिस्थिति में घर से दूर अपनी पहचान बनाने में बल मिला। आलोचनाओ एवं टिप्पणियों को पीछे छोड़ते हुए कुछ और करने का जुनून उत्पन होता रहा | प्रथम नियुक्ति जिस विद्यालय में थी वहां उस समय प्रथम कार्य नामांकन बढ़ाना और उन बच्चो को उनकी पहली सीढ़ी पर चढ़ने के योग्य बनाना यही लक्ष्य था। उस विद्यालय में प्रथम वर्ष कार्य करते हुए बहुत ही बदलाव दिखने लगे । बच्चो के अंदर संस्कृतिक गुण पहले से विद्यमान थे उनके अंदर पढाई के प्रति आत्मविश्वास जागृत करने का कार्य करने में सफल रही। गृह जनपद से आने के कारण बहुत से अनजानी परेशानियों का सामना करती रही। उसी समय जब मिशन शिक्षण संवाद से परिचित हुई ,मिशन की ओर से कपिलवस्तु 2017 महोत्सव में नवाचारी शिक्षको की आश्चर्यजनित प्रस्तुति देखने का ओर देने का अवसर प्राप्त हुआ। वहा जाकर देखने पर एहसास हुआ की मेरी परेशानी कुछ भी नही, प्रदेश के सभी जिलों से आये सभी नवाचारी शिक्षको के प्रदर्शन ने मन को झकझोर दिया। मैंने दृढ़ता के साथ संकल्प लिया और अपने आप को 3 साल की बच्ची के साथ 30 किलो मीटर की दूरी तय करके अपने आप को विद्यालय के लिये समर्पित कर दिया। कपिलवस्तु में सम्मानित होने की बाद सरकारी महकमे में बहुत ही टिप्पणियां सुनने को मिली,उनको दरकिनार करते हुए विद्यालय के भौतिक परिवेश को सुदृढ़ करने का प्रयास किया इसी बीच मेरा अंतर्जनपदीय स्थानांतरण न होकर मेरा चयन उस विद्यालय से और दूर 4 अप्रैल 2018 में मॉडल इंग्लिश मध्यम जैतपुर निधियावां भीटी अम्बेडकर नगर में हो गया। जब मै वहाँ कार्य ग्रहण करने गयी तो विद्यालय के भौतीक परिवेश को देख कर मन प्रफुलित हो गया ,इतना बड़ा कैम्पस हरा भरा अपनी ओर आकर्षित कर रहा था,वहाँ प्राथमिक और जूनियर एक में ही था, दोनों विद्यालय को मिलाकर 350 बच्चो की संख्या ,एक साथ प्राथना ,भोजन करवाना। विद्यालय परिवार का आपसी सहयोग देख कर हृदय खुशी से झूम गया। वहाँ सारी सुविधाएं उस गाँव के पूर्व प्रधान के 5 लाख रुपये के सहयोग से करवाया गया। सब कुछ होने के बाबजूद वहा के बच्चो में अपने आपको प्रस्तुत करने में हिचकिचाते थे । सबसे बड़ा कारण कोई भी महिला अध्यापक न होना। मैंने वहाँ बच्चो और लड़कियों के साथ मिलकर कला, क्राफ्ट ,मेहदी कार्यक्रम का आयोजन करवाया। गीत संगीत भी शुरू किया गया। यह विद्यालय गांव से बाहर था इसलिये बालिका शिक्षा में थोड़ा पीछे ,फिर गांव में भ्रमण करके बालिकाओ को विद्यालय रोज आने के लिये प्ररित करने में असफलता के साथ सफलता मिली। फिर अंदर एक आत्मविश्वास जगाने के लिये *समर कैम्प* का आयोजन एवं प्रतियोगितायें करवायी गयी। उस आयोजन के कारण वहां के ग्रामीण समुदाय की सहभागिता बढी, और उनमें उत्साह आया और उनसे सुनने को मिला की कोई विद्यालय में आया है। यह सुन कर और अच्छा करने की इच्छा हुई। जब कभी भी कभी परेशानियों से हार जाती और नौकरी छोड़ने का मन करता तो मेरी माँ हिम्मत देती और कहती तुम कर सकती हो अपना नाम ऊँचा करो दूसरे जनपद से आकर नौकरी करखे कम समय में इतना नाम तो इन जनपद के रहने वाले ने भी नही कमाया ये बहुत बड़ी बात है। तुम अपना काम ईमानदारी से करो औऱ करते जाओ मै तुम्हारे साथ हूँ । इस तरह 4 साल पूरे हो गए । अब मेरे विद्यालय के बच्चो में आश्चर्य जनित सुधार दिख रहा है। ये देख कर मेरा पूरा विद्यालय परिवार मेरे साथ साथ कार्य कर रहा है। इससे मेरा और मेरे पुरे विद्यालय परिवार का नाम न्यायपंचायत ,ब्लॉक, जनपद में गूज रहा है।
*धन्यवाद् मिशन शिक्षण संवाद ।।।।।*
*प्रेरक सन्देश-* _मेरा धर्म, कर्म, पूजा,सम्मान मेरी और मेरे विद्यालय के बच्चे।इन्हे ही आगे बढ़ाना मेरा सबसे बड़ा कर्तव्य है। इन्हे अनुशासन के साथ ऊँची बुलंदियों पैर पर पहुचाना है।। यही कामना मेरी सभी से है।।_
_✏संकलन_
*📝टीम मिशन शिक्षण संवाद।*
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