अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक 57,परिणीता सिंह ,बस्ती

*👩🏻‍🏫अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक*

*मिशन शिक्षण संवाद परिवार की बहनों की संघर्ष और सफ़लता की कहानी*

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*👩‍👩‍👧‍👧महिला सशक्तीकरण- 57*
(दिनाँक- 29 अप्रैल 2019)

*नाम - परिणिता सिंह*
पद  - प्रधानाध्यापक
विद्यालय- प्राथमिक विद्यालय महसो प्रथम जिला बस्ती

*सफलता एवं संघर्ष की कहानी:-*👉🏼
कहते हैं कि जीवन में कुछ करने का जुनून हो तो रास्ते नियती स्वयं निर्धारित करती है हम केवल उस रास्ते पर चलकर समाज मे अपने लिए निर्धारित उस भूमिका को निभाने के लिए जीवनपर्यन्त प्रयास कर सकते हैं । आज महिला सशक्तिकरण के संदर्भ में मिशन शिक्षण संवाद के इस मंच से बहुत सी महिला अध्यापिकाएँ शिक्षा के क्षेत्र में किये गए अपने कार्यों , अपने अनुभवों को साझा करने का प्रयास किया है जो शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों एवं इस क्षेत्र में आनेवाले नवीन आगंतुक के लिए बेहद उपयोगी एवं प्रेरणादायी है।
इसी क्रम में मैं अपने जीवन तथा एक शिक्षक के रुप मे अपने कार्यों, उसमें आने वाली चुनौतियों एवं उनसे लड़कर एक बेहतर कल के अपने सपने जैसे अनुभव को साझा करना चाहती हूँ ।
                  एक शिक्षक के घर मे पले बढ़े होने के कारण स्वाभाविक रूप से एक शिक्षक के जीवन को बहुत पास से देखने का अवसर प्राप्त हुआ और समाज मे उनकी प्रतिष्ठा को देखकर शुरुआत से एक शिक्षक बनने का सपना बुना था। कहते हैं की समाज मे जिस कार्य को करने वाले कि प्रतिष्ठा ज्यादा होती है उस समाज के ज्यादातर लोग उसी कार्य को करने का प्रयास करते है।मैं भी उससे अछूती नही थी। विवाह के उपरांत मै ने बी.एड. करने का निर्णय लिया जिसमें मुझे अपने परिवार का पूर्ण सहयोग मिला।कॉलेज के लिए रोज मुझे 50 किमी यात्रा करनी पड़ती थी जो शरीर को थका देने वाली प्रक्रिया थी लेकिन कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है ।    
परिवार में महिलाओं की सभी भूमिकाओं का निर्वहन करते हुए मै ने अपनी पढ़ाई पूरी की और बतौर शिक्षिका के रूप में मेरी नियुक्ति हुई।
                    मेरी प्रथम नियुक्ति के समय मुझे बेहतर सहयोगियों के साथ काम करने का अवसर प्राप्त हुआ जिससे मुझे एक टीम वर्क का महत्व समझ आया कि विद्यालय में बेहतर शिक्षण के लिए शिक्षकों का आपसी सहयोग कितना महत्वपूर्ण है ।वहीं अपने वरिष्ठ अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधि (प्रधान) के कार्यों को पास से देखने जानने का अवसर प्राप्त हुआ और यह पता चला कि विद्यालय की बेहतरी के लिए इन सभी लोगों का सहयोग कितना आवश्यक है । सीखने की प्रक्रिया में मुझे सरकार द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न ट्रेनिंग प्रोग्राम में ट्रेनिंग करने का अवसर मिला जो मेरे व्यक्तित्व निर्माण में सहायक  और शिक्षण में आधुनिक तकनीकी तथा नवोन्मेष की उपयोगिता को समझने में बहुत उपयोगी रहे । शिक्षिका के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए मुझे प्रधानाध्यापक का दायित्व देकर महासो प्रथम भेज दिया गया जहाँ शुरुआती अनुभव अच्छा नही रहा।विद्यालय की स्थिति बच्चों की संख्या ,बुनियादी सुविधाओं ,आधारभूत संरचना,   गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,को लेकर बेहद गंभीर थी। इस परिस्थिति में मेरी प्रथम वरीयता विद्यालय में बच्चों के नामांकन में वृद्धि करना था जिसके लिए मै ने गाँव के प्रधान एवं समुदाय में प्रतिष्ठित लोगों के सहयोग से बच्चों के अभिभावकों को शिक्षा के महत्व एवं उससे होने वाले जीवन मे परिवर्तन को समझाने में सफल रहे इस प्रकार नामांकन में वृद्धि हुई। दूसरी ओर विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं जैसे पेयजल, शौचालय इत्यादि को लेकर अपने वरिष्ठ अधिकारियों का ध्यान दिलाने में सफल रही और आवश्यक धनराशि प्राप्त होने के पश्चात पुरुष तथा महिला शौचालय का निर्माण करवाया जिसपर हमारी सरकार विशेष रूप से जागरूक है जिससे अपनी बात अपने अधिकारियों को समझाने में सहयोग मिला। वहीं आधारभूत संरचना के विकास के मद में आनेवाली धनराशि का प्रयोग  क्लासरूम में रंगरोगन ,बच्चों को बैठने के लिए डेस्क बेंच की व्यवस्था करना ,पुस्कालय का निर्माण इत्यादि में किया जिसने विद्यालय में बच्चों के नामांकन में वृद्धि में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। बच्चों को ड्रेस, टाइ और बेल्ट के साथ स्कूल में प्रवेश करने की शिक्षा जिससे बच्चों में अनुशासन की भावना का विकास किया जा सकता है ।
           तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कार्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना इसके लिए स्कूल में वाल पेंटिंग के माध्यम से शिक्षाप्रद
संदेश , गणित ,संविधान, इतिहास, भूगोल, इंग्लिश ,प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्तित्व, वैज्ञानिक इत्यादि के बारे जानकारी को सरलता से समझाने सिखाने के लिए प्रयोग करना । आई सी टी के माध्यम से विभिन्न विषयों का वीडियो द्वारा ज्ञानपरक शिक्षा देने का प्रयास। CAMAL
में अपने ट्रेनिंग के अनुभव के द्वारा बच्चों को समूह उनके सीखने के स्तर पर ना कि उनके कक्षा के स्तर पर बनाया तथा विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से शिक्षित करने का प्रायस किया जिसमें बच्चे सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय घटक की भूमिका निभाते है। बच्चों को समसामयिक घटनाओं के प्रति जागरूक करने के लिए प्रतिदिन चर्चा का आयोजन, प्रतिदिन बच्चों से प्रश्न पूछने की गतिविधि जिससे बच्चों में प्रश्न पूछने की क्षमता को विकसित किया जा सकता है।देश के महान विभूतियों के जयंती में नाट्यमंच ,गीत का आयोजन।आस पास के ऐतिहासिक एवं पौराणिक स्थलों,चिड़ियाघरों ,इत्यादि का भ्रमण के माध्यम से सिखाने और समझाने का प्रयत्न । खेलकूद,नृत्य ,गायन ,पेंटिंग इत्यादि के माध्यम से बच्चों के चहुँमुखी विकास को सुनिश्चित करना। वृक्षारोपण,और पर्यावरण संरक्षण की उपयोगिता को समझाते हुए पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना।
                  इन सभी प्रयासों से अब मेरे विद्यालय और बच्चों में आश्चर्यजनक सुधार दिखायी दे रहा है। मैं दावे के साथ ये नहीं कह सकती की मैंने सभी कार्य पूर्ण कर लिए हैं क्योंकि सीखने और सिखाने की ये प्रक्रिया आजीवन चलती रहेगी
           *सन्देश:-*  _रख हौसला वो मंजर भी आयेगा; प्यासे के पास चल के समुन्दर भी आयेगा! थक कर न बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर; मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मज़ा भी आयेगा!_

_✏संकलन_
*📝टीम मिशन शिक्षण संवाद।*

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