अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक,45,मृणाली वर्मा,अयोध्या

*👩🏻‍🏫अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस विशेषांक*

*मिशन शिक्षण संवाद परिवार की बहनों की संघर्ष और सफ़लता की कहानी*

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*👩‍👩‍👧‍👧महिला सशक्तीकरण- 45*
(दिनाँक- 17 अप्रैल 2019)

*नाम- मृणाली वर्मा*
पद- प्र०प्रधानाध्यापिका
विद्यालय- प्राथमिक विद्यालय खानपुर
ब्लाक - मिल्कीपुर,जनपद - अयोध्या
प्रथम नियुक्ति तिथि-09/08/2010
वर्तमान विद्यालय में कार्यभार ग्रहण- 01/11/2012

*सफलता एवं संघर्ष की कहानी :-*
मुझे यह कहते हुए बेहद गर्व होता है कि मैं एक शिक्षिका हूँ और उस से भी ज्यादा गर्व इस बात का होता है कि ईश्वर ने मुझे ज्ञान प्रदान करने के लिए उन बच्चोंको मेरे सम्मुख रखा है जिन्हे शिक्षा से संबंधित किसी बात का कोई ज्ञान नही है। सभी अभिभावक अशिक्षित व वनमानुष प्रजाति के थे। जिनको न तो शरीरिक साफ -सफाई का ज्ञान था , न शिक्षा के महत्व से मतलब। वे सिर्फ पशु के समान समाज से नजरें चुरा के जीविकोपार्जन कर रहे थे। जब मैनें इस विद्यालय में कार्यभार ग्रहण किया तो देखा उन बच्चों का नामांकन होने के बावजूद वे यहाँ नही आना चाहते थे। फिर मैंने उनसे संपर्क स्थापित करने का निश्चय किया। उनकी बस्ती मे जाने पे मुझे नाक पे रुमाल रखना पड़ा। पूरा जन जीवन अस्त व्यस्त सा था। उनसे बात करना चाहूँ तो वो देख कर भाग रहे थे, छुप रहे थे। सर्वप्रथम मै एक महिला के पास उसकी झोपड़ी के अंदर तक गई, जहाँ जमीन पे छोटे छोटे बच्चे अधपका भोजन जमीन पर इधर उधर बैठ के अस्त व्यस्त तरीके से खा रहे थे, उससे बात करने पर पता चला कि ये सभी पत्तल बना के बेचते हैं, जिसमे सपरिवार वे जंगलो से पत्तियाँ तोड़ने जाते हैं स्कूल जाने से उन्हें कोई फायदा नही है। मैंने उन्हे समझाया कि मैं स्वयं एक महिला हूँ। पहले लोग लड़कियों को नहीं पढ़ाते थे, लेकिन अब देखो हमारे अगल बगल समस्त स्कूलों मे महिला अध्यापक, डॉक्टर और पढ़ लिख कर नौकरी करने वाली पूरी पूरी टीम है, उन्हे पढ़ने का महत्व समझाया, ये सब् एक दिन मे नही हुआ, मैने कई बार जा जा कर उनका मनोबल भी बढ़ाया।। वे राजी हुए। फिर बच्चे विद्यालय आये, लेकिन उनके बगल कोई बैठना नही चाहता था, क्योंकि वे नहाते नही थे। उनके पास से गुजरने मे ही दुर्गंध आती थी। मैंने उनके लिए विद्यालय मे बाल्टी,मग, साबुन, तेल कंघी, शीशा आदि की व्यवस्था की। विद्यालय आकर उन्हे नहाने मे अच्छा अनुभव होने लगा। खुश्बुदार साबुन से नहाने व साफ सुधरा रहना उन्हे भाने लगा। जिसके चलते वे बच्चे विद्यालय मे नियमतः आने लगे व उपस्थिति दर मे गुणात्मक सुधार हुआ।। धीरे धीरे मैंने वहाँ की बड़ी लड़कियों को भी बुला के अलग से शिक्षा प्रदान की,जब वे थोड़ा पढ़ना लिखना सीख गयीं तो उनको पास कस्तूरबा बालिका विद्यालय में नामांकन कराने के लिए प्रेरित किया।  05  सितम्बर 2017 को *बी.एस. ए. मैंम आदरणीय श्रीमती डॉ०अमिता सिंह जी ने  अच्छे विद्यालय संचालन के लिए प्रशस्ति-पत्र* देकर सम्मानित किया । मैं कला के क्षेत्र से भी जुड़ी हुई हूँ, जिसके कारण विद्यालय की आंतरिक साज सज्जा व TLM निर्मांण के कारण मेरा विद्यालय आकर्षण का केंद्र है। इसी के चलते *रंगोली कला में मुझे  9 सितम्बर 2018 को संस्कार भारती के अंतर्गत पर्यटन मंत्री श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी जी के द्वारा सम्मान प्राप्त हुआ*। जिले  में  मिल्कीपुर कस्तूरबा गाँधी आवसीय बालिका विद्यालय में छात्राओं  को मैंने कला संबंधी विशेष प्रशिक्षण  प्रदान किया था, जिससे *यहाँ की बेटियों ने जनपद स्तर की प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर अपना परचम लहराया। जिसके कारण उन बेटियों के साथ दिनाँक -  03/04/2019 को जिलाधिकारी अयोध्या आदरणीय श्री अनुज कुमार झा जी से सम्मान प्राप्त हुआ।*

मैं मृणाली वर्मा "मिशन शिक्षण संवाद"और मिशन शिक्षण संवाद से जुड़े सभी साथियों का धन्यवाद एवं आभार प्रकट करती हूँ जिन्होंने हमेशा मुझे प्रेरित किया और मेरा हौसला बढ़ाया।

_"मैं अकेली हूँ, लेकिन फिर भी मैं हूँ,मैं सब कुछ नहीं कर सकती लेकिन मैं कुछ तो कर सकती हूं,और सिर्फ इसलिए कि मैं सब कुछ नहीं कर सकती मैं वो करने से पीछे नहीं हटूंगी जो मैं कर सकती हूँ।"_
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_✏संकलन_
*📝टीम मिशन शिक्षण संवाद।*

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